सज संवर कर दीदार करती है
साजन से सजनी प्यार करती है
रखती है कठिन उपवास करवाचौथ
दिखे कब चाँद इंतजार करती है
हर आहट पे लगता साजन चले आये
खुद को कितना बेकरार करती है
सहनशील होती है नारियां देखा है
देती आवाज और पुकार करती है
घर को सजा देती सँवार देती है नारी
खुशियां से घर आँगन बहार करती है
#किशोर छिपेश्वर ‘सागर’
परिचय : किशोर छिपेश्वर ‘सागर’ का वर्तमान निवास मध्यप्रदेश के बालाघाट में वार्ड क्र.२ भटेरा चौकी (सेंट मेरी स्कूल के पीछे)के पास है। आपकी जन्मतिथि १९ जुलाई १९७८ तथा जन्म स्थान-ग्राम डोंगरमाली पोस्ट भेंडारा तह.वारासिवनी (बालाघाट,म.प्र.) है। शिक्षा-एम.ए.(समाजशास्त्र) तक ली है। सम्प्रति भारतीय स्टेट बैंक से है। लेखन में गीत,गजल,कविता,व्यंग्य और पैरोडी रचते हैं तो गायन में भी रुचि है।कई पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित होती हैं। आपको शीर्षक समिति ने सर्वश्रेठ रचनाकार का सम्मान दिया है। साहित्यिक गतिविधि के अन्तर्गत काव्यगोष्ठी और छोटे मंचों पर काव्य पाठ करते हैं। समाज व देश हित में कार्य करना,सामाजिक उत्थान,देश का विकास,रचनात्मक कार्यों से कुरीतियों को मिटाना,राष्ट्रीयता-भाईचारे की भावना को बढ़ाना ही आपका उद्देश्य है।
Sat Oct 27 , 2018
चौथ व्रती बन पूजती, चंदा चौथ चकोर। आज सुहागिन सब करें,यह उपवास कठोर। यह उपवास कठोर , पूजती चंदा प्यारा। पिया जिए सौ साल, अमर संयोग हमारा। कहे लाल कविराय, वारती जती सती बन। अमर रहे तू चाँद, पूजती चौथ व्रती बन। . नारि सुहागिन कर रही,पूजा जप तप ध्यान। […]