नरेंद्र पाल जैन : गीत की गूंज का चमकता सितारा

रश्मिरथी

नरेंद्र पाल जैन : गीत की गूंज का चमकता सितारा

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डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’

राजस्थान की धरती के जिला उदयपुर के ग्राम ऋषभदेव में  पिता श्री श्रीपाल जी और माता श्रीमती कमलादेवी की संतान के रूप में जन्मे नरेंद्रपाल बचपन से प्रतिभाशाली और कला-साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय है। स्नातक तक पढ़े नरेंद्रपाल वर्तमान में राजकीय सेवा  में बतौर निजी अधिकारी कार्यरत है। नाट्य लेखन और अभिनय, वाद विवाद के साथ ही काव्य सृजन की ओर मुखरित हुए। लगभग २० वर्षों से काव्यमंचों पर सक्रीय  नरेंद्र जी ने लगभग अब तक 2500 से अधिक रचनाएँ लिखी है। आपने तीन पुस्तिकाएँ मन्थन… एक सोच (पद्य एवम् आलेख), मनोभाव – पद्य, गागर-  पद्य लिखी है। आप ‘कविकुल भूषण’, प्रशासन द्वारा ‘श्रेष्ठ साहित्यकार’ , राष्ट्रीय कवि संगम द्वारा ‘काव्यश्री सम्मान’ , आदि सम्मान से सम्मानित होचुके है। पर्यावरण, पृथ्वी, जल संरक्षण सम्बन्धी रचित आपके जागृति दोहे विभिन्न विद्यालयों में बच्चों को पढ़वाये जा रहे हैं। साहित्यिक मंचों के साथ कवि सम्मेलनों में मंचों पर भी निरन्तर सहभागिता एवं मंच संचालन में भी दक्ष है।  साहित्य और सामाजिकता में वर्ष 2017 का ‘युवा रत्न” पुरस्कार’ मुंबई में आपको प्राप्त हुआ । साहित्य के क्षेत्र में उपलब्धियों हेतु ‘युवा प्रतिभा पुरस्कार’ एवं आदर्श युवा सम्मान श्रवण बेलगोला बेंगलोर में आपको प्राप्त हुआ। फरवरी 2018 में ‘अंतरा शब्द शक्ति सम्मान’ एवं ‘भाषा सारथी सम्मान’ इंदौर में मिला।

सैकड़ों कविसम्मेलनों में हिंदी भाषा की  स्थापित करते हुए गीत विधा में अपना सर्वश्रेष्ठ देने वाले नरेंद्र पाल की प्रसिद्ध कविता ‘आदमी की औकात’ से अलग पहचान आपकी बनी। जिसे राष्ट्र सन्त मुनि श्री तरुणसागर जी एवं राष्ट्रसन्त मुनि श्री पुलकसागर जी गुरुदेव द्वारा सैंकड़ों लोगों को उपदेशित किया और , सोशल मीडिया और अखबारों में खूब छाई। हिंदी साहित्य  सृजन हेतु राजस्थान पत्रिका, नगर परिषद, युवा भारत, काव्य सृजन परिवार,  जिला प्रशासन द्वारा भी आपको सम्मान मिले। विदेशो में भी हिन्दी कविता और गीतों को आपने बखूबी स्थान दिलवाने का कार्य किया है। प्रत्येक वर्ष महावीर जयंती पर कस्बा ऋषभदेव में हिंदी कवि सम्मेलन का सूत्रधार एवं संयोजन आप ही करते है। अद्भुत प्रतिभा के धनी नरेंद्रपाल जैन मंचों के सूत्रधार होने के साथ-साथ बेहरीन गीतकार भी है जो मंचों पर हिन्दी की गरिमा भी बचाने का सार्थक कार्य करते है।

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नरेंद्र पाल जैन 

विधा- गीतकार
अनुभव – २० वर्ष से अधिक

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।