मुश्किल बड़ी डगर में हूँ
अभी तो मैं सफर में हूँ
अपना कोई दिखता नहीं
लगता है मै शहर में हूँ
जिंदा यहां कातिल शहर में
माँ की दुआओं की असर में हूँ
नाम है मेरा या बदनाम हूँ मैं
किस अखबार की खबर में हूँ
जाने क्या होगा अंजामे सफर
मैं खुदा की नजर में हूँ
#किशोर छिपेश्वर ‘सागर’
परिचय : किशोर छिपेश्वर ‘सागर’ का वर्तमान निवास मध्यप्रदेश के बालाघाट में वार्ड क्र.२ भटेरा चौकी (सेंट मेरी स्कूल के पीछे)के पास है। आपकी जन्मतिथि १९ जुलाई १९७८ तथा जन्म स्थान-ग्राम डोंगरमाली पोस्ट भेंडारा तह.वारासिवनी (बालाघाट,म.प्र.) है। शिक्षा-एम.ए.(समाजशास्त्र) तक ली है। सम्प्रति भारतीय स्टेट बैंक से है। लेखन में गीत,गजल,कविता,व्यंग्य और पैरोडी रचते हैं तो गायन में भी रुचि है।कई पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित होती हैं। आपको शीर्षक समिति ने सर्वश्रेठ रचनाकार का सम्मान दिया है। साहित्यिक गतिविधि के अन्तर्गत काव्यगोष्ठी और छोटे मंचों पर काव्य पाठ करते हैं। समाज व देश हित में कार्य करना,सामाजिक उत्थान,देश का विकास,रचनात्मक कार्यों से कुरीतियों को मिटाना,राष्ट्रीयता-भाईचारे की भावना को बढ़ाना ही आपका उद्देश्य है।
Wed Sep 19 , 2018
बेटी जनमी जिण घराँ,कुदरत रो वरदान। पढ़ा लिखाअर् मान द्यो, पाछै कन्यादान। पाछै कन्या दान, देओ सब मन सूँ दुआ। ईश्वर रा शुभ वरदान,जनम बेटी रा हुआ। कहे लाल कविराय,सुता सूँ मत कर हेठी। दोनी कुल़ री बात, आन मान शान बेटी। . *2* बेटी हो बड़ भाग सूँ, समझै […]