सर्वोपरि हिंदी

renu
कल रात मेरे सपने में हिंदी आई
अपनी पीड़ा कुछ इस तरह बताई
क्यों सबने अंग्रेजी की रीत अपनाई
अपने ही जहां में मैं हुई पराई
हर कोई मुझे कर रहा उपेक्षित
यह सुन मेरी आंख गलानि से भर आई
सोचा घर -घर जाकर करूं प्रचार
क्यों ना अपने विद्यालय से ही शुरू करूँ
मन में आया यह नेक विचार
बच्चों में प्रेरणा जगाऊं,
कोमल मन में हिंदी को बसाऊं
सांस्कृतिक एकता की है यह प्रतीक
उनको मैं बताऊँ
मानवीय गुणों से ओतप्रोत प्रेम का मीठा दरिया है
दुनिया को जोड़ें आपस में वह मजबूत धागा है
ज्ञान की देवी है ये मैं उसको गले लगाऊं
हिंदी हमारी आशा है ,
हिंदी सर्वप्रिय भाषा है
गीत इसी के मैं गाऊँ
आजादी की लड़ी लड़ाई वह भी हिंदी
जिस ने हमें दिलाई आजादी वह भी हिंदी
नादान नहीं थे हिंदी के पुरोधा हरिश्चंद्र
कवि मतिराम नहीं थे बुद्धि से हीन
दिन-रात कलम चलाकर हिंदी में
ही कृति रचा करते थे महान
हिंदी मेरी शान है ,ये गुणों की खान है
सच बताऊँ हर भारतवासी की पहचान है
जातीयता संकीर्णता से परे
अनेकता में एकता का सूत्र महान है
इसका करूं कहां तक गुणगान
मेरे लब न ले विराम
है राष्ट्रीयता की आत्मा ये
हिंदी जन्नत की गंगा है
यह माध्यम स्वाधीन देश का है
जिसका ध्वजा तिरंगा है
यह भारत माता के माथे की बिंदी है
मिलन और सौहार्द की भाषा हिंदी है
दुनिया में सर्वोपरि भाषा हिंदी है
दुनिया की सर्वोपरि भाषा हिंदी है।
#रेनू शर्मा*शब्द मुखर*
जयपुर

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।