कल्याणकारी बाढ

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naveen sah
आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी  राघवेन्द्र ने मंत्री जी से कहा -“सर! हर साल बाढ आती  है, हजारो लोग मारे जाते हैं, देश को अरबों -खरबों का नुकसान होता है, इसका कोई स्थायी निदान क्यों नही निकाला जाता? ”
मंत्री महोदय राघवेंद्र जी को घूरते हुए-“हीं……..,तो है तुम्हारे पास कोई स्थायी निदान?”
राघवेंद्र-“जी सर, ये तो आसान है, आप भी जानते हैं कि भारत में अनेक जगह ऐसे हैं जहाँ पानी का अभाव है मतलब वहाँ की नदियाँ सूखी रहती है, क्यों न सबको जोड़ दिया जाए ताकि जहाँ पानी कम है वहाँ पानी भी मिल जाए और जहाँ ज्यादा है वहाँ बाढ की समस्या भी खत्म हो जाए।”
मंत्री महोदय चश्मा खिसकाते हुए-“इसका खर्चा सोंचे हो?”
राघवेंद्र-“सर खर्चा तो राहत सामग्री आदि मे भी होता है, और हर साल होता है।”
मंत्री महोदय -“तुम ज्यादा पढ़े-लिखे लोगो की यही प्रोब्लम है, छोटी-छोटी बातें तुम्हारे पल्ले पड़ती हीं नही!
सुनो! इससे बहुतो का कल्याण होता है जिसमें तुम जैसे हजारों अफसर है, जिंदो को खाना, अनाज, मरने वालो के परिजनों को मुआवजा आदि।और साथ में हमें हमारा मेहनताना!
क्या जी, बनता है कि नही, कल हीं देखो पूरे चार घंटा मुयायना किये हैं उड़नखटोले से।”
राघवेन्द्र जी हाँ में हाँ मिलाते हुए नजर झूका लिए।

#नवीन कुमार साह
परिचय : नवीन कुमार साह बिहार राज्य के समस्तीपुर स्थित ग्राम नरघोघी में रहते हैं। श्री साह की जन्मतिथि १६ अप्रैल १९९४ है। दरभंगा (बिहार) से २०१५ में स्नातक (प्रतिष्ठा) की उपाधि प्राप्त करने के साथ ही अभी बी.एड. जारी है। अध्यापन ही आपका पेशा है। वर्तमान सृजन (द्वितीय) विमोचनाधीन है। कई पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन हुआ है। आप छंद, लघुकथा व छंदमुक्त कविताएं लिखते हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।