कभी ऐसे भी कुछ झरने खोते रहे हम,
बस इक तस्वीर देखकर रोते रहे हम.
कभी रातें भी गुलज़ार थी तेरी चहक से,
कभी दिन को रात मानके सोते रहे हम.
चादर की सलवटों से तेरी महक जाती नहीं,
कई दफा मल-मल के उसे धोते रहे हम.
मेरी सारी वफायें बेअसर ही रह गयीं,
खामखां बंजर में गुलाब बोते रहे हम
#डॉ.नीना जोशी
परिचय : डॉ.नीना जोशी मुलत: इंदौर, मध्यप्रदेश निवासी है |आपने होम्योपैथी चिकित्सा में एम.एस की डिग्री हासिल की है |
आप वरिष्ठ कांग्रेस नेता अरविंद जोशी की धर्मपत्नी है|चिकित्सकिय कर्म के उपरांत आपकी हिन्दी साहित्य में गहरी रूचि है | आप मातृभाषा उन्नयन संस्थान की प्रदेश सचिव भी हैं |