एक सलाम देश के जवानो के नाम 

garima sinh

कलम उठाकर नमन मैं लिख दूँ वीरों के बलिदान को
जिसने अब तक जिंदा रक्खा है भारत की पहचान को!
गौरवशाली इस भूमि का मान बढ़ाया है जिसने
अपना शीश काटकर भी सम्मान बचाया है जिसने
जिसने अपनी जान गंवाकर लाज बचाई माटी की
प्राण न्यौछावर करके रक्षा की भारत के थाती की
जिसने आदर्श बना डाला दुनियाँ भर में सेना की शान को !!
कलम उठाकर नमन मैं लिख दूँ वीरों के बलिदान को….
दिन रात जो सरहद पर डटकर सीमा की रखवाली करते हैं
धूप , छाँव,  सर्दी, गर्मी में भी आंह नही जो भरते हैं …
अपने कर्तव्यो की खातिर जो दर्द हजारों सहते है
शीश नवाकर नमन करूं उन वीरों के अभिमान  को !!
कलम उठाकर नमन मैं लिख दूँ वीरों के बलिदान को ….
माँ की ममता बहन का प्यार भुलाकर
यारों की मस्ती और पिता का दुलार भुलाकर
गाँव की हरियाली औऱ अपनों का परवाह भुलाकर
जीते हैं जो वीराने में ये संसार भुलाकर
मन करता है आभार मैं लिख दूँ उनके त्याग महान को !!
कलम उठाकर नमन मैं लिख दूँ वीरों के बलिदान को !!
जिसने अब तक जिंदा रक्खा है भारत की पहचाना को!!
जय हिन्द जय हिन्द की सेना 
#गरिमा सिंह
परिचय- 
नाम-  गरिमा अनिरुद्ध सिंह
साहित्यिक उपनाम-मधुरिमा
राज्य-गुजरात
शहर-सूरत
शिक्षा- एम ए प्राचीन इतिहास
कार्यक्षेत्र-शिक्षण
विधा – हास्य ,वीर रस ,शृंगार

matruadmin

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छोटे से दिमाग़ में बसा ली है दुनियाँ

Thu Aug 9 , 2018
छोटे से दिमाग़ में बसा ली है दुनियाँ चारों और कौन देखता है चौतीस हो गयीं बर्बाद मुजफ्फरपुर कौन देखता है उन्नाओ, सूरत, मणिपुर, दिल्ली कौनसा हिस्सा बचा मेरे हिन्दुस्तान अब रोना आता है मुझको बच्चियाँ लाचार, कौन देखता है जब तक बीते न ख़ुद पे बड़े व्यस्त हैं हम चलो प्रार्थना ही करलें पुकारें बेटियाँ कौन देखता है विनती हैं पीड़िताओं के लिये अपने अपने ईश्वर, भगवान, मालिक, ख़ुदा जिसे भी मानते है से इक बार  प्रार्थना/दुआ जरूर करे  #डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।