बिगुल बज गया राष्ट्रभाषा का।
प्रत्येक बालक बालिका जगी।।
इंदौर जागा राजस्थान जागा।
हिंदी संगणक योद्धा भी जगा।।
हिन्दी भाषा माता है सबकी।
मातृभाषा डॉट कॉम वेब की।।
अन्तराशब्दशक्ति प्रकल्प की।
हिन्दी ग्राम समूह वटवृक्ष की।।
मातृभाषा उन्नयन संस्थान के ।
अर्पण,प्रीति का एक ही नारा है।।
राजभाषा को राष्ट्रभाषा तक।
पहुँचाना कर्त्तव्य अब हमारा है।।
गाँधी जी ने जो अलख जगाई।
गूँज उठी भारत के जन-जन में।।
हिन्दी राष्ट्रभाषा की जय गूँजी।
भाषा सारथी के समवेत स्वर में।।
राजस्थान भी नही रहा पीछे ।
राष्ट्रभाषा की नव दहलीज पर।।
ताज हिन्दी का चमक रहा था।
जननी मातृभूमि के मस्तक पर।।
महादेवी, ललद्यद, सुभद्रा, मीरा।
तुलसी, कबीर, रहीम, रसखान।।
दिनकर, पंत, निराला,बच्चन जी।
हिन्दी माता के उपासक कहलाए।।
हिन्दी भाषा के प्रिय अनुरागियों के।
नाम कहाँ तक ‘रिखब’तुम्हें गिनाए ?
जीवन अर्पित किया जिन लोगो ने।
आओ श्रद्धा भाव से सुमन चढ़ाएँ।।
#रिखबचन्द राँका
परिचय: रिखबचन्द राँका का निवास जयपुर में हरी नगर स्थित न्यू सांगानेर मार्ग पर हैl आप लेखन में कल्पेश` उपनाम लगाते हैंl आपकी जन्मतिथि-१९ सितम्बर १९६९ तथा जन्म स्थान-अजमेर(राजस्थान) हैl एम.ए.(संस्कृत) और बी.एड.(हिन्दी,संस्कृत) तक शिक्षित श्री रांका पेशे से निजी स्कूल (जयपुर) में अध्यापक हैंl आपकी कुछ कविताओं का प्रकाशन हुआ हैl धार्मिक गीत व स्काउट गाइड गीत लेखन भी करते हैंl आपके लेखन का उद्देश्य-रुचि और हिन्दी को बढ़ावा देना हैl