‘योग’

sunita bahal
योग भगाए रोग,
रखे निरोग।
योग शरीर, मन और आत्मा को रखता जोड़,
यही जीवन का निचोड़,
इसलिए योग अपनाओ।
योग का गौरवमयी इतिहास,
प्राकृतिक पद्धति से देता लाभ,
योग से मन की वृत्तियों पर रहता नियंत्रण,
जीवन मे लाता सकारात्मक परिवर्तन,
इसलिए योग अपनाओ।
योग शरीर को देता उत्तम आकार,
जवानी को रखता बरक़रार,
योग शरीर एवं मन के लिए वरदान,
करता मानवता का कल्याण,
इसलिए योग अपनाओ।

योग तनाव को रखता दूर,
नींद भी आती भरपूर,
शरीर में ‘प्राण वायु’ का होता संचार,
योग से लाभान्वित हो सारा संसार,
इसलिए योग अपनाओ।

योग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता,
बीमारियों के प्रकोप से बचाता,
योग जीवन को बेहतर बनाने की पद्धति,
शरीर को मिलती ऊर्जा एवम शक्ति,
इसलिए योग अपनाओ।

योग जीवन के लिए है प्रकाश,
उतना चमके जितना करो अभ्यास,
यह है जीवन जीने की कला,
शरीर को रखे स्वस्थ,
जो परमात्मा से दे मिला,
इसलिए योग अपनाओ।

योग है जीवन का उत्तम अनुभव,
योगक्रियाओं से समझो इसका मतलब,
हर समस्या को योग से करो पार,
योग जो करता वो सच्चा कलाकार,
इसलिए योग अपनाओ।

योग मानसिक एवं आत्मिक शांति का स्त्रोत,
ऊर्जा से कर देता ओत प्रोत,
योग एक धर्म नहीं, योग है विज्ञान,
कह गए बड़े-बड़े विद्वान,
इसलिए योग अपनाओ।

#सुनीता बहल

नाम- सुनीता बहल
राज्य – हरियाणा
शहर- रोहतक
शिक्षा- एम.एस.सी, एम.एड
कार्यक्षेत्र- साइंस अध्यापिका
विधा- कविता, लघुकथा
प्रकाशन – हरिगंधा, साहित्य अमृत, पंजाब  सौरभ, प्रयास पत्रिका (कनाडा), भारत दर्शन (न्यूजीलैंड),
समाचार पत्र रोहतक भास्कर , हरिभूमि, जागरण
सम्मान- साहित्य- सोम सम्मान-पत्र (शैली साहित्यिक मंच), रोहतक
काव्य रंगोली मातृत्व ममता सम्मान- 2018
लेखन का उद्देश्य- हिंदी का प्रचार प्रसार, अपनी सोच लोगों तक पहुंचाना, बच्चों के लिए मनोरंजक साहित्य उपलब्ध करवाना

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।