रैन बसेरा

pushpa sharma
चलते-चलते थक गए थे पाँव,
दिख नहीं पाई कहीं दरख्त की छाँव
रोजी-रोटी की तलाश में,
छोड़ आया था गाँव
पर मिल कहाँ पाया,
कोई रहने का ठाँव
पड़ोस के दीनू काका,
के कहने पर ही तो
आ गया था महानगर में,
औकात से कुछ अधिक
कमाने की कामना में,
पर अभी काम मिला नहीं।
विवशता थी काका की
झुग्गी में जगह नहीं
तीन बच्चों और घरवाली
का साथ है
जैसे-तैसे बीतती रात है
जल-पान उन्होंने करवाया
असमंजस में मैंने अपना
कदम बढ़ाया
काम ढूँढने कल भी जाना है
पर अभी समस्या रात
बिताना है आखिर,
अँधेरा तो होना ही था
पाँवों को भी आगे बढ़ने
से जबाब देना ही थाl

फुटपाथ पर बैठा एक बूढ़ा भिखारी
भाँप गया था दुविधा सारी,
बैठने का करके इशारा
खिसक गया
पीने के पानी की बोतल
हाथ में पकड़ा गया,
प्लास्टिक के एक टाट को
फैलाकर
धीरे-धीरे बोला फुसफुसाकर
अभी भीड़ कम है सोने
की जगह रोक लो
दिनभर के थके हो लेटकर थकान मिटा लो,
विवशता में और विकल्प था नहीं
थैला सिरहाने रख लेट
मैं गया वहीं
नींद तो आई नहीं पर,
सोच रुकी नहीं
आज का रैन बसेरा
कल तो रहेगा नहीं
मेरे जैसा थका हारा
और आएगा,
रात का विश्राम ले
आगे बढ़ जाएगा
फिर जहन में एक निश्चय आ गयाl
गाँव का घर और
खेत मन को भा गयाll

                                                               #पुष्पा शर्मा 
परिचय: श्रीमती पुष्पा शर्मा की जन्म तिथि-२४ जुलाई १९४५ एवं जन्म स्थान-कुचामन सिटी (जिला-नागौर,राजस्थान) है। आपका वर्तमान निवास राजस्थान के शहर-अजमेर में है। शिक्षा-एम.ए. और बी.एड. है। कार्यक्षेत्र में आप राजस्थान के शिक्षा विभाग से हिन्दी विषय पढ़ाने वाली सेवानिवृत व्याख्याता हैं। फिलहाल सामाजिक क्षेत्र-अन्ध विद्यालय सहित बधिर विद्यालय आदि से जुड़कर कार्यरत हैं। दोहे,मुक्त पद और सामान्य गद्य आप लिखती हैं। आपकी लेखनशीलता का उद्देश्य-स्वान्तः सुखाय है।

matruadmin

Next Post

अन्तर्मन की पीड़ा

Sat Nov 18 , 2017
दिल के रिश्ते जब हिसाब करते हैं, हर दिन हर उत्सव उदास करते हैं। समय की धारा जब विपरीत बहती, तो आँखों से आँसू सवाल करते हैं॥ करूण वेदना से प्लावित दो ह्रदय, अन्तर्मन की पीड़ा का जवाब भरते हैं। अनसुलझे सम्बन्धों की गुत्थी को, बार-बार सुलझाने का प्रयास करते […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।