“पाना है जो मुकाम वो अभी बाकी है”

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neeraj varma
घायल जिस्म में जान अब भी बाकी है,
कहता है पाना है जो मुकाम वो अभी बाकी है।
बेशक आज कमज़ोर है घायल है मगर खुदसे लड़ने को  राज़ी है,
बहुत तडपा है ज़िन्दगी में आगे और तड़पना पड़े तो कोई गम नहीं
के पाना है जो मुकाम वो अभी बाकी है।
तन्हा है वो अकेला रहा है ज़िन्दगी में,
हार नहीं मानी अब तक तो जीतने की आस अब भी बाकी है
अभी तो खड़ा हुआ है गिरके और कहता है छुने को अभी आसमान बाकी है
के पाना है जो मुकाम वो अभी बाकी है।
अभी तो सिर्फ एक कतरा बहा है खून का आगे तो लेना है हिसाब करते कतरे की एक एक बूँद का,
और शिकश्त दे रही है ज़िन्दगी हर मोड़ पर
समय का चक्र घूमना अभी बाकी है
के पाना है जो मुकाम वो अभी बाकी है।
समय की क्या बात करें आज तो हवाएं भी उससे रूठी है,
समाज दुनिया जहाँ की बातें उसके लिए झूटी है।
कहीं गैरों से तो कहीं अपनों से लड़ाई है,
असल में तो ज़िन्दगी की जंग खुदसे है
और उस जंग को फतह करना अभी बाकी है
के पाना है जो मुकाम वो अभी बाकी है
 पाना है जो मुकाम वो अभी बाकी है।
# नीरज वर्मा
रायपुर (छत्तीसगढ़)

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