मेरे सामने दराज खुली पड़ी है, दराज में पत्रों की पिटारी है। अंतर्देशीय, लिफ़ाफ़े, पोस्टकार्ड, पत्र खुले, सहसा अतीत खुल गया। पत्रों में से चेहरा अम्मा का उभर आया। ’बिटिया, तुम्हारी चिंता बहुत रहती है। लाडो, तुम्हारी याद भी बहुत आती है। सावन में आ रही हो न! तुम्हारी पसंद […]

वासनाओं के घड़े हैं, देखिए कब फूटते हैं, ध्येय में ही दोष सारे, भाव कब ये सूझते हैं! रोज़ दिखना, रोज़ छपना, रोग कैसा, सत्य कहना। लेखनी की तज महत्ता संगतों में क्यों विचरना? धार के तैराक देखो, पोखरों में डूबते हैं, ध्येय में ही दोष सारे, भाव कब ये […]

सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला” सरोज स्मृति 1935 ई. में सूर्यकांत त्रिपाठी निराला द्वारा लिखी लंबी कविता और एक शोकगीत है। निराला ने यह शोकगीत 1935 में अपनी 18 वर्षीया पुत्री सरोज के निधन के उपरांत लिखा था। इसका प्रथम प्रकाशन 1938 या 1939 में प्रकाशित “द्वितीय अनामिका” के प्रथम संस्करण में […]

स्वनाम धन्य है अमृतसर नानक की धरा, अमृत है भरा इक ऊंकार हर ज़ुबान पर रहे सेवा का व्रत सबने है लिया हिंदूस्तान की आज़ादी थी धर्म खेत -खलिहान, गली-मोहल्ला युवा–सा जोश, उम्र का नाम होश 1919 की बैसाखी ने रचा इतिहास पंज दरिया की‌ धरा ख़ून से नहाई जलियांवाला […]

आज़ादी के पन्नों पर, जलियांवाला बाग। आज भी ऑंखें भीगती, मन हो जाता है उदास। रोलेट एक्ट विरोध था, पर शांतिमय स्वरूप। लेकिन जनरल डायर तो, बन गया था यम का दूत। करवाया नरसंहार वो, फैला था ख़ून ही ख़ून। निहत्थे मारे गए, बस दिखा था ख़ून ही ख़ून। हृदय […]

आओ-आओ एक बात बतायें, भारत का इतिहास सुनायें, कहतीं थीं दादी और नानी, उनकी कहानी मेरी ज़ुबानी।। भारत के वीर सपूतों ने, देखो कितना त्याग किया, आज़ादी की खातिर अपने, प्राणों का बलिदान दिया।। ब्रिटिश शासन ने तो देखो, कितना अत्याचार किया, क्या बूढ़े, क्या महिला, बच्चे, सब पर ही […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।