ये रोज हमें आवाज लगाता कौन है, नदी किनारे मीठा गीत गाता कौन है। सुबह नींद से हमें जगाता कौन है, ख्वाब में आता नहीं,ख्यालों में आता कौन है। हमारे नाम से ख़त भिजवाता कौन है, ये रस्ता और वो मंजिल पर पहुँचता कौन है। झूठ बोलकर आया हूँ, तेरे […]

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कुछ हैं मेरे सपने, कुछ सच्चे,कुछ कच्चे.. कुछ खट्टे,कुछ मीठे, कुछ सिमटे,कुछ बिखरे। कुछ अनमने,कुछ अनकहे, कुछ दिखलाते,कुछ धुंधलाते.. कुछ कराहना,कुछ मुस्कुराते, कुछ आते,कुछ जाते। समेटना चाहूँ,तो मुमकिन नहीं, सपनों ने ही बिखेरा है मुझको.. आस और आस,न रहा कोई पास, रुक-रुक के आते हैं। बवंडर-सा मचा जाते हैं, कभी […]

ये नजर, ये नज़ारे.. सबके सब जाने क्यूँ करते हैं इशारे.. बस, एक तरफ। वो अनजान, वो बेखबर.. बैठे हैं न जाने, नादान हैं.. या बने बैठे हैं। हम, ये सब सोचकर.. तने बैठे हैं।                               […]

स्वागत है पुण्य पथ पे सदकाम कीजिएगा, मन को पवित्र मंदिर-सा धाम कीजिएगा। भारत ये विश्व गुरू की गद्दी पे पुनः बैठे, मेरी कामना को पूरन हे राम कीजिएगा। लाख उड़ानें सब भरते हैं सजन यहाँ पर कौन बना? आदर्शों की बात छेड़कर लखन यहाँ पर कौन बना.. सोच रही […]

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पगडंडियों के सहारे, सफर तय न करना.. खुद से रास्ता बनाने का हौंसला रखना। चलना लीक पर सदैव, पर लीक से हटकर भी.. कुछ नया करना पगडण्डियों के सहारे यूँ कमजोर मत बनना। कायम रखना स्वयं का, अस्तित्व कि.. हर रहगुज़र पूछे तुम्हारी ऊँचाई का रास्ता। रोशन करते रहना अँधेरों […]

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मातृभूमि पर शीश चढ़ाने अपना सीना तान, चल-चल रे नौजवान.. माँ का आँचल दुश्मनों ने रक्त रंजित कर दिया, अनगिनत गोलियों से लहूलुहान कर दिया.. माँ की दुर्दशा देख रो रहा आसमान, चल-चल रे नौजवान…। दुश्मनों को गोलियों से भूनकर रख दो, हाथ जो उठे तो ऊपर,खण्ड-खण्ड कर दो। हौंसले […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।