अपने मुँह का दिया निवाला है। माँ ने ऐसे ही मुझको पाला है।। जबसे रक्खा क़दम है धरती पर। मेरी माँ ने मुझे सम्भाला है।। जब मैं चलने लगा था थोड़ा-सा। बाप ने गोद में उछाला है।। मेरी माँ जब भी रोने लगती है। प्यार से हर घड़ी सम्भाला है।। […]
काव्यभाषा
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