नन्हीं-सी प्यारी-सी, नादान होती है, बेटियां तो माँ बाप की पहचान होती है। न हो बेटी तो वंश न हो वीरान हो घर, घर में रौनक और उजाला लाती हर पहर। सिर को गर्व से ऊँचा करती है , बेटियां तो माँ बाप की पहचान होती है। एक रुन्द आहट […]
काव्यभाषा
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ए गुलमोहर,तुझे देखकर,यादें ताजा हो आई, तेरी वो तेरी नाजुक पंखुड़ी, यादें बचपन की ले आई। झुकी डालियों से अनुरक्ति,कैसे बयां करुं बचपन की, तेरी रक्तिम आभा से जुड़ गई,स्वर्णिम यादें जीवन की। सखियों संग हँसते-गाते,कितने अनजान ज़माने थे, वो नादानी कहती है,बचपन में हम कितने इतराते थे। यौवन की दहलीज न जाने कब लांघी,हमने सकुचाते शरमाते, जाने कब […]
