——संजीव वर्मा ‘सलिल’
जबलपुर , म.प्र.
जी रहा हूँ श्वांस हर तेरे लिए,
पी रहा हूँ प्यास हर तेरे लिए।
हर ख़ुशी-आनंद है तेरे लिए,
मीत! मेरा छंद है तेरे लिए।
मधुर अनहद नाद है तेरे लिए,
भोग,रसना,स्वाद है तेरे लिए।
वाक् है,संवाद है तेरे लिए,
प्रभु सुने फ़रियाद है तेरे लिए।
जिंदगी का भान है तेरे लिए,
बन्दगी में गान है तेरे लिए।
सावनी जलधार है तेरे लिए,
फागुनी सिंगार है तेरे लिए।
खिला हरसिंगार है तेरे लिए,
सनम ये भुजहार है तेरे लिए।।
(१९ मात्रिक महापौराणिक जातीय आनंदवर्धक छंद)
Next Post
रेखा
Sat May 27 , 2017
जाने कौन-सा धन मुझमें देखा! जाने क्यूँ मुझसे रुठ गई गरीबी रेखा।। लाख चाहा मैंने इसके नीचे आऊँ, इसके कदमों तले बिछ जाऊँ और पा जाऊँ छोटा कूपन, अब नहीं सही जाती मुझसे मँहगाई की तपन।। हे ! गरीबी की रेखा माता मुझ पर तू हो जा प्रसन्न, ताकि मैं […]

पसंदीदा साहित्य
-
February 24, 2021
युग परिवर्तक
-
September 14, 2018
गौरी नन्दनं गणेश
-
June 11, 2018
अन्नदाता की औकात….
-
October 9, 2018
माँ अंबे नव अवतार
-
April 6, 2017
प्यार हो सम्मान हो
