था एक दृढ़ संकल्प नहीं था कोई विकल्प, दुनिया में है अब एक विशाल पवित्र प्रकल्प। अपार सद्गुणों के महासागर प्रभु श्रीराम, परहित जन्में राम, परहित किए सदकाम। रामराज्य लाने हित जिएँ हम सब आठों याम, संगठित सज्जन रामकाज किए बिना नहीं करें विश्राम। भारतीय संस्कृति का है मूल आधार […]
काव्यभाषा
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