अचानक ही मेनका के पति ने उस पर हमेशा की तरह हाथ उठाया लेकिन ये क्या घ् आज चिन्टू ने उसके हाथ को जोर से पकड़ लिया, बोला अब नही बस बहुत हो लिया, आज के बाद मां को हाथ भी लगाया तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा समझ लेना […]

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यह एक मूर्खतापूर्ण बात है कि हिंदी की प्रगति के लिए प्राइवेट कंपनियों और प्राइवेट अस्पतालों को हिंदी में पढ़े-लिखे इंजीनियर और डॉक्टर को अपने यहाँ नौकरी पर रख लेना चाहिए | उनको मुनाफे से मतलब है, हिंदी या अंग्रेजी से नहीं | मुनाफे की खातिर वे योग्य लोगों को […]

किसी काम के नहीं पिता अब पड़े हुये हैं कोने में बड़ी नखरची मिली बहुरिया रोज बदलती भाषा नहीं समय पर रोटी-पानी बढ़ती रोज निराशा लगे है ऐसे गयी रोशनी आँसू आँख भिगोने में परछाई भी आती-जाती घर के अंदर-बाहर घुड़क रही है ऐसे देखो जैसे गरजे नाहर पिचकी आँते […]

शफ़क़ में सफ़ेद …. समंदर नमक का चमचमाते पुखराज के टुकड़ों-सा, लोगों का हुज़ूम फिर भी जाने क्यों,तन्हा छोटे-छोटे गड्ढों पर पड़ा पानी लगते उसके आँसू क्या लोगों के पैरों तले रौंदे जाने का दर्द ? या अकेलापन,उपेक्षा कोई खोदता,मुट्ठी में भरता उछालता,चखता फेंककर चला जाता खोदे जाने का ज़ख्म […]

कभी-कभी औरत के हाथों की चूड़ियाँ बन जाती है हथकड़ी, कभी-कभी औरत के पाँवों की पायल बन जाती पाँव की कड़ी। जिंदगी जीती है औरत,पर नासूर की तरह रिस-रिसकर, काजल बन जाता है,रात का अंधेरा,    नीर बहाती हैं आखें बड़ी-बड़ी॥ मांग में लगता है,सिन्दूर किसी अंगार की तरह दहकता-सा, […]

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माँ को सूली पे चढ़ा रख़ा है,देखो किसने।                                                        अपनी कोख से जिसे जन्म दिया है उसने॥ नहीं याद रहा कोई भी ऋण माँ […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।