कभी आश्चर्य होता है, किस तरह से हमारे मनीषियों, ऋषियों, दिव्य विभूतियों ने,चारों युगों के, गुण धर्मानुसार नामकरण किए। शायद उन्हें पता था, कि चौथा युग होगा ऐसा कलयुग, जहां के कलयुगी प्राणी, कल पुर्जों से घिरे रहेंगे। यंत्र चालित से संवेदनहीन रहेंगे, धुँआ खाएंगे ,धुआँ छोड़ेंगे और धुआँ ही […]

 भारत ,जहाँ कहा जाता है “कोस-कोस पर पानी , तीन कोस पर बानी ” इस परिदृश्य में देश के विभिन्न भाषा -भाषाई जन को एक सूत्र में पिरोने वाली हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी की गरिमा ,मान -सम्मान, विश्वव्यापी पहचान और स्थान, पाठ्यक्रमों में हिंदी , राजकीय कार्य की भाषा हिंदी ,न्यायालयों […]

जैसे ही गीता ने मोबाइल ऑन किया, धड़ धड़ करते व्हाट्स एप मेसेज का ढेर लग गया… गर्ल्स ग्रुप १०५,खानदान ५३,देवरानी जेठानी ३………… “क्या है आज, जो गर्ल्स ग्रुप (उसके पति के बॉस की वाइफ एडमिन थी उस ग्रुप की, सब उन्हें भाभीजी बोलते हैं) में  इतने मेसेज ,यही सोच […]

 *मन मेरा, मेरा दर्पण*  कितने सच  और  कितने झूठ  छिपा रखे हैं  तन में  मन में  ना तू जाने  ना वो जाने  जाने केवल उसको  मैं और मेरा मन  *मन मेरा, मेरा दर्पण*  ************************  भले कर्म  और  बुरे कर्म  का पूरा हिसाब  लिखा रखा है  ना तू देखे  ना वो […]

काहे का रिश्ता और काहे का दखल..आज मनुष्य इतना स्वार्थी और संवेदनहीन हो गया है कि,रिश्तों की अहमियत नहीं समझ सकता। आज कोई किसी के काम में अनावश्यक तो क्या आवश्यक दखल भी नहीं देता। कहीं बात का बतंगड़,तिल का ताड़ न बन जाए। कोई किसी पर भरोसा नहीं करता,और […]

वो दूर क्षितिज पर सूरज निकल गया है, अपनी जगमग किरणों से उसने हमारी असंख्य, आशाओं को रौशन कर दिया है, कल शाम की सुप्त हुई आकांक्षाओं को जाग्रत कर दिया है, अब चलो… उठ जाते हैं अपनी उम्मीदों की गठरी को उमंग के कांधे पर लादकर घर से निकल […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।