मातृभूमि

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मातृ-भूमि की गोद में,है स्वर्गिक आनन्द।
जियें-मरें इसके लियें, रच लें सुन्दर छन्द।।1।।

इसके पूजन हेतु हम,तन-मन-धन ले सर्व।
हम पैदा इस पर हुए, हमको  इसका  गर्व।।2।।

अपनी भाषा में करें,हम इसका गुण-गान।
इसका बढ़  जायगा, अपना  भी  सम्मान।।3।।

अमृत सा जल पी रहे, चन्दन  सी  है  धूल।
इसके  अर्चन  में   चढ़े, भाषा-सुन्दर  फूल।।4।।

मातृ-भूमि,  भाषा भली,  सुन्दर  इसके  ठाट।
खोल रखें मन के सदा,खिड़की सहित कपाट।।5।।

नाम–मदनमोहन पाण्डेय
वर्तमान पता-कुशीनगर
राज्य-उत्तर प्रदेश
शहर–पडरौना
शिक्षा-परास्नातगक(हिन्दी,संस्कृत)
कार्यक्षेत्र–शिक्षा(प्रवक्ता-ने.इ.का.मंसाछापर,कुशीनगर,उ.प्र.)
विधा–काव्य
प्रकाशन–तीन साझा काव्यसंग्रह(द पोयट्री सोसायटी आफ इण्डिया,गुणगाँव,हरियाणा)
दो साझा काव्यसंग्रह(श्री सत्यम प्रकाशन झुँझुनू राजस्थान)
सम्मान-हिन्दी सेवी सम्मान,काव्य गौरव सम्मान,काव्य सागर सम्मान,दैनिक श्रेष्ठ रचना कार सम्मान,सरस्वती सम्मान,उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान,उत्कृष्ट समाज सेवी सम्मान
अन्य–विभिन्न मञ्चों से काव्यपाठ
लेखन उद्देश्य–हिन्दी साहित्य की सेवा
एक रचना–उपरि लिखित

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।