मित्र 

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noushad varasi
एक मित्र आया था
उदास चेहरे के साथ
रुपया मांगने
विश्वास पर
हमने रुपया दे दिया
आठ महीने बीत गए
इसी इंतेजार में
आज देगा या कल
अब जरुरत पड़ी मुझे
रुपया की तो
न कॉल उठाता है
न ही कॉल करता है
सोच – सोच कर मन
व्याकुल हो जाता है
मित्रता की पहचान
अब दगाबाज होती जा रही है
विश्वास अब न रहा
मित्र पर
सब धोखा दे देते हैं ।
नाम- नौशाद वारसी
पता- समस्तीपुर(बिहार)
शिक्षा – अन्तर स्नातक M.A.( राजनीती शास्त्र)
शौक – राजनीती, समाजसेवा, साहित्यिक पठन- पठान ।
 लेखन विद्दा – कविता , गजल, मुक्तक,कहानी, शायरी, दोहे ।
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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।