वट-सावित्री

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keshav
आज पवित्र पर्व वट सावित्री की है,
आज के दिन सुहागिन महिलायें!
कथा सुनती सत्यवान-सावित्री की है।
वट वृक्ष के नीचे आज स्त्री पूजा करती हैं,
बांस के पंखे से वट वृक्ष को हवा करती हैं।
कच्चा धागा लपेटकर परिक्रमा करती हैं,
उसके बाद ध्यान से सभी कथा सुनती हैं।
आज पूजा और कथा सुनकर!
वो पति के दीर्घायु की कामना करती है,
उनके लिए पूरा दिन उपवास रखती हैं।
यह पावन त्योहार हमसभी के जीवन में,
सौभाग्य,दीर्घायु और आरोग्य प्रदान करती है,
सभीके दुःख,तकलीफ और पापों को हरती है।
इससे वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है,
और इसके पूण्य से पति की उम्र बढ़ता है।
वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेष रहते हैं,
और सभीलोगों कि मनोकामना पूर्ण करते हैं।
स्त्रियों द्वारा किये त्याग का अनुपम श्रृंगार है,
स्त्रियां!पुरुषों के लिए एक उत्तम उपहार है।
माताओं-बहनों को मुबारक यह त्योहार है,
सभी के चरण कमलों में नमन बारम्बार है।
सभी के चरण कमलों में नमन बारम्बार है।।
          #केशव कुमार मिश्रा

 परिचय: युवा कवि केशव के रुप में केशव कुमार मिश्रा बिहार के सिंगिया गोठ(जिला मधुबनी)में रहते हैं। आपका दरभंगा में अस्थाई निवास है। आप पेशे से अधिवक्ता हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।