माँ —के होने का अहसास

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pavan anam
आँगल में अठखेलियां करता अबोध बच्चा
बगल के कमरे में सोई हुई उम्र दराज दादी ।
खेत में पसीना बहाता पिता,
घर के पीछे बने बाड़े में
पशुओं का जुगाली करते हुए
घर की दहलीज की और निहारना,
माँ के होने का अहसास करवाते है।
रसोई में व्यवस्थित पड़े बर्तन,
चूल्हे के की हुई ताजा पुताई,
चमकते हुए पानी से लबालब मटके,
आँगन में पतले तार पर झूलते हुए कपड़े,
गोबर की सुंगध बिखेरती दीवारे,
दूध से भरी हुई बाल्टी,
नवीन कवरो से लिपटी हुए बिस्तर,
किसी कोने में सहजता से पड़ी हुई झाड़ू ,

माँ के होने का अहसास करवाती है।
बच्चों के कपड़ो के पर लगे बेमेल दागो से सिले हुए बटन,
स्कूल के लिए बनाई हुई थैले की बेग,
घर की चक्की का हर रोज गतिशील मिलना,
दादी के लिए बनाई हुई खिचड़ी के दानो का पीसा हुआ होना,
पापा के कपड़ो पर की हुई
इस्त्री,
सुबह के बिस्तर मे अचानक चाय का आ जाना,
घर के हर कोने में,
चमक बिखेरती रंगाई,

माँ के होने का अहसास करवाती है।

                           #पवन-अनाम

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।