हिन्दुस्तां वतन है,
अपना जहां यही है।
यह आशियाना अपना जन्नत से कम नहीं है॥
उत्तर में खड़ा हिमालय रक्षा में रहता तत्पर।
चरणों को धो रहा है,दक्षिण
बसा सुधाकर।
मलयागिरि की शीतल समीर बह रही है।
हिन्दुस्तां…,
यह आशियाना…॥
फल-फूल से लदे तरुओं की शोभा न्यारी।
महकी हुई है प्यारी केसर की खिलती क्यारी,
कलरव पखेरुओं को तितली उछाल रही है।
हिन्दुस्तां…,
यह आशियाना…॥
अनमोल खजानों से वसुधा
भरी है सारी।
खेतों में बिखरा सोना होती
है फसलें सारी,
ये लहलहाती फसलें खुशियाँ लुटा रही है।
हिन्दुस्तां…,
यह आशियाना…॥
मिट्टी में इसकी हम सब पलकर बड़े हुए हैं।
आने न आँच देंगे,ऐसे ही प्रण लिए हैं,
मिट जाएं हम वतन पर
तमन्ना यह रही है।
हिन्दुस्तां वतन है अपना,जहां यही है।
यह आशियाना अपना
जन्नत से कम नहीं है॥
#पुष्पा शर्मा
परिचय: श्रीमती पुष्पा शर्मा की जन्म तिथि-२४ जुलाई १९४५ एवं जन्म स्थान-कुचामन सिटी (जिला-नागौर,राजस्थान) है। आपका वर्तमान निवास राजस्थान के शहर-अजमेर में है। शिक्षा-एम.ए. और बी.एड. है। कार्यक्षेत्र में आप राजस्थान के शिक्षा विभाग से हिन्दी विषय पढ़ाने वाली सेवानिवृत व्याख्याता हैं। फिलहाल सामाजिक क्षेत्र-अन्ध विद्यालय सहित बधिर विद्यालय आदि से जुड़कर कार्यरत हैं। दोहे,मुक्त पद और सामान्य गद्य आप लिखती हैं। आपकी लेखनशीलता का उद्देश्य-स्वान्तः सुखाय है।