ऐसे न देखो ऐ सनम…

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pradeep kumar epk
ऐसे  ना  देखो  ऐ   सनम,
हम  दिवाने   हो   रहे   हैं।
पलकें  जरा  झपका  लो,
हम    इनमें   खो   रहे  हैं।
ऐसे ना देखो…॥
जब  से  दिखे  हो सनम,
टूटे  हैं  हमारे  सब भरम।
सच कहूं तुम्हारी  कसम,
हम   मस्ताने  हो  रहे  हैं।
ऐसे ना देखो…॥
ऐसे  हुआ  हुश्न-ऐ-असर,
तुमको  कहा जाने जिगर।
तुम बनो  अब  हमसफर,
सब  अनजाने हो  रहे  हैं।
ऐसे ना देखो…॥
कुछ तो कहो मेरी ग़ज़ल,
ऐसे ना बनो  तुम  हजल।
यहां सब तराने हो रहे हैं,
अपने फसाने हो रहे हैं।
ऐसे ना देखो…॥
ऐसे  ना  देखो  ऐ  सनम,
हम  दिवाने  हो  रहे   हैं॥
            #इं. प्रदीप कुमार
परिचय : इं.पी.के. हाथरसी सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश के खन्दारी गढ़ी( हाथरस) में रहते हैं। आपका मूल नाम इं. प्रदीप कुमार और उपनाम इं.पी.के. हाथरसी है। शिक्षा-बी.टेक करके पेशे से इंजीनियर ही हैं। रुचि गीत,कविता और लेख के लेखन में है।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।