गुरू अमृत

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rikhabchand
गुरू की वाणी से….राम बने महान,
गुरू की आज्ञा से…आरूणि बने महानl  
गुरू की बुद्धि से…कालिदास बने महान, 
गुरू की भक्ति से….एकलव्य बने महानl  
गुरू के परिश्रम से…यवक्रीत बने महान, 
गुरू की संगति से….रत्नाकर बने महानl  
गुरू की चौदह विद्या से…कौत्स बने महान, 
गुरू के अनोखे मंत्र से…रामानुज बने महानl 
गुरु की सेवा में ही है मेरी शान,
गुरू की सेवा से…’रिखब’ बनेगा महानll 

                                                                #रिखबचन्द राँका

परिचय: रिखबचन्द राँका का निवास जयपुर में हरी नगर स्थित न्यू सांगानेर मार्ग पर हैl आप लेखन में कल्पेश` उपनाम लगाते हैंl आपकी जन्मतिथि-१९ सितम्बर १९६९ तथा जन्म स्थान-अजमेर(राजस्थान) हैl एम.ए.(संस्कृत) और बी.एड.(हिन्दी,संस्कृत) तक शिक्षित श्री रांका पेशे से निजी स्कूल (जयपुर) में अध्यापक हैंl आपकी कुछ कविताओं का प्रकाशन हुआ हैl धार्मिक गीत व स्काउट गाइड गीत लेखन भी करते हैंl आपके लेखन का उद्देश्य-रुचि और हिन्दी को बढ़ावा देना हैl  

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