माँ की करुणा

1
Read Time3Seconds
rajnish dube
हाँ साधारण-सी पानी हूं मैं,
व्यर्थ पूजते हो तुम मुझको
हाँ,अकारण-सी बहती हूं मैं,
पवित्रधार क्यों कहते मुझको।
न मैं माँ हूं…न कोई देवी,
फिर भी सबके कष्टों को सहती
क्यों कहते तुम माँ हो मुझको,
जब मेरी पीड़ा न तुमको दिखती।
गंगाजल तो हिमकल जल है,
पर मेरा जल क्यों गंदाजल है?
सोच के देखा है…क्या तुमने,
कितनी गलतियाँ छुपाती हूं मैं।
रोज सुबह मल बहा के जल में,
शाम को तट पे तुम्हें पाती हूं
क्यों करते हो?? ढोंग पूजकर,
मेरी गरिमा का हास्य बनाकर।
सोचूं जलप्राणी जब मृत पाती हूं,
जीवनदायिनी कह-कहकर मुझको
 मेरा जल तुमने छिन-भिन्न किया।
अब तो स्वयं को दोषी कहकर,
क्यों अवतरित हुई कह देती हूँ
पुण्यदायिनी क्यों कहते हो मुझको
 जब हर पापों को मेरे तट करते हो।
नाम नर्मदा,गरिमा थी मेरी पर,
तुम तो बेटे होकर के भूलते हो॥
                                                       #रजनीश दुबे’धरतीपुत्र'
परिचय : रजनीश दुबे’धरतीपुत्र' की जन्म तिथि १९ नवम्बर १९९० हैl आपका नौकरी का कार्यस्थल बुधनी स्थित श्री औरोबिन्दो पब्लिक स्कूल इकाई वर्धमान टैक्सटाइल हैl  ज्वलंत मुद्दों पर काव्य एवं कथा लेखन में आप कि रुचि है,इसलिए स्वभाव क्रांतिकारी हैl मध्यप्रदेश के  के नर्मदापुरम् संभाग के  होशंगाबाद जिले के सरस्वती नगर रसूलिया में रहने वाले श्री दुबे का  यही उद्देश्य है कि,जब तक जीवन है,तब तक अखंड भारत देश की स्थापना हेतु सक्रिय रहकर लोगों का योगदान और बढ़ाया जाए l  
0 0

matruadmin

One thought on “माँ की करुणा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

व्यथा

Mon Nov 27 , 2017
किसी की गजल थी तो गुनगुनाई गई थी कभी, किसी की रुबाई थी तो साज पे गाई गई थी मैं। मयखानों में साकी बनी तो सहलाई गई थी मैं, रुख पे नकाब सजा था तो सराही गई थी मैं। बीच राह नल छोड़ गया खोई निशानी दुष्यंत भूल गया, कुदृष्टि […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।