हिंदी मेरी भाषा

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हिंदी मेरी मातृभाषा ,

हिंदी मेरी जान !

हिंदी के हम कर्मयोगी ,

हिंदी मेरी पहचान ,

हिंदी मेरी जन्मभूमि ,

हिंदी हमारी मान ,

हम हिंदी कि सेवा करते है ,

हम जान उसी पे लुटाते है !

हिंदी हमारी मातृभाषा ,

हिंदी हमारी जान !

है वतन हम हिंदुस्तान के ,

भारत मेरी शान ,

हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा ,

हिंदी हमारी एकता ,

हिंदी में हम बस्ते है ,

हिंदी मेरी माता !

हिंदी है हमारी मातृभाषा ,

हिंदी मेरी जान !

हिंदी मेरी वाणी ,

हिंदी मेरा गीत , ग़ज़ल ,

हिंदी के हम राही ,

हिंदी के हम सूत्र-धार ,

हिंदी मेरी विश्व गुरु ,

हिंदी मेरी धरती माता !

हिंदी है हमारी मातृभाषा ,

हिंदी मेरी जान !

रूपेश कुमार

छात्र एव युवा साहित्यकार

शिक्षा – स्नाकोतर भौतिकी , इसाई धर्म(डीपलोमा) , ए.डी.सी.ए (कम्युटर),बी.एड

वर्तमान-प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी !

प्रकाशित पुस्तक ~ ‘मेरी कलम रो रही हैं’ और ‘मेरी अभिलाषा’,’मेरा भी आसमान नीला होगा’ एवं आठ साझा संकलन!

विभिन्न राष्ट्रीय पत्र- पत्रिकाओं मे कविता,कहानी,गजल प्रकाशित !

कुछ सहित्यिक संस्थान से सम्मान प्राप्त !

पता ~ पुरानी बाजार चैनपुर

पोस्ट – चैनपुर, जिला – सीवान

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Mon Sep 14 , 2020
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Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।