ग़म-ए-जुदाई

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durgesh
मुद्दतें गुज़र गई,तफ्सील से बतियाए।
हुई इनायत-ए-खुदा,कि आखिर आप आए॥
शाम-ए-ग़ज़ल सुनाऊँ या,हाल-ए-दिल सुनूं तुम्हारा।
नज़र-ए-बयां करुं या,दिखाऊँ यह दिलनशीं नज़ारा॥
तेरी मासूमियत पर,मेरी ख़ुशी मुस्कुराए।
मुद्दतें गुजर गई,तफ्सील से बतियाए॥
हुई इनायत-ए-खुदा,कि आखिर आप आए।
आलम गुज़रे ज़माने का,न कभी मज़लिस नाम हुआ।
मिटी कभी तन्हाई तो,मैं महफ़िल में भी बदनाम हुआ॥
तेरे बिन वक्त जैसे,मुझे वहीं ठहरा पाए।
मुद्दतें गुज़र गई,तफ्सील से बतियाए॥
हुई इनायत-ए-खुदा,कि आखिर आप आए।
हुस्न-ए-रौनक भी कहीं,बस खोई-सी मुझे लगती है।
गम-ए-जुदाई में,आप भी डुबोई-सी मुझे लगती है॥
आओ मिल जाएं कि शब रंगीन हो जाए।
मुद्दतें गुज़र गई,तफ्सील से बतियाए॥
हुई इनायत-ए-खुदा,कि आखिर आप आए॥
                                                    #दुर्गेश कुमार
परिचय: दुर्गेश कुमार मेघवाल का निवास राजस्थान के बूंदी शहर में है।आपकी जन्मतिथि-१७ मई १९७७ तथा जन्म स्थान-बूंदी है। हिन्दी में स्नातकोत्तर तक शिक्षा ली है और कार्यक्षेत्र भी शिक्षा है। सामाजिक क्षेत्र में आप शिक्षक के रुप में जागरूकता फैलाते हैं। विधा-काव्य है और इसके ज़रिए सोशल मीडिया पर बने हुए हैं।आपके लेखन का उद्देश्य-नागरी की सेवा ,मन की सन्तुष्टि ,यश प्राप्ति और हो सके तो अर्थ प्राप्ति भी है।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।