Read Time1 Minute, 28 Second
बुझने को थी मगर शमा,हंसकर जला गया कोई,
हमपे तीर-ए-नज़र नया,हंसकर चला गया कोई।
अंधेरों में डूबा हुआ,वीरान-सा था दिल मेरा,
दिल मे चिंगारी नई,हंसकर लगा गया कोई।
उसके लबों को छूने की,हसरत-सी दिल में थी मगर,
ये प्यास मेरे लबों की थी,हंसकर बुझा गया कोई।
किसी को देख लें जरा,जुल्फ भी संवार दें,
सोई हुई उम्मीद को,हंसकर जगा गया कोई।
अब तलक तो द्वार पे,होतीं न थी ये हलचलें,
आज मेरे द्वार को,हंसकर हिला गया कोई।
हँसते हुए पिया तो था,जाम दर्द का मगर,
राख-ए-सुकून जाम में, हंसकर मिला गया कोई॥
#आनंद कुमार पाठक
परिचय: आनंद कुमार पाठक का निवास शहर बरेली के शास्त्री नगर(इज़्ज़त नगर) में है। आपकी जन्मतिथि-४ फरवरी १९८८ तथा जन्म स्थान-बरेली(उत्तर प्रदेश)है। एम.बी.ए. सहित एम.ए.(अर्थशास्त्र) की शिक्षा ली है। नौकरी आपका कार्यक्षेत्र है। आपकॊ पढ़ाई में उत्कृष्टता के लिए स्वर्ण पदक मिलना बड़ी उपलब्धि है। लेखन का उद्देश्य-साहित्य में विशेष रुचि होना है।
Post Views:
516