प्रकृति पूजा(छठ पूजा)

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madhav jha

चलो चलें देखने आस्था की भीड़,
नदी-तलाबों,जलाशय पे उमड़ रही है…
दुल्हन बनी है आज प्रकृति,फिजाएं,
मन को लुभा रहा है मनभावन दृश्यl
चलो चलें देखने….ll
सजे हैं घाट कितने मनोहर,
मीठे-मीठे फल-पकवानों से…
कर रहे नमन सभी जन मिलकर,
हो रहे अस्तगांचल रवि कोl
चलो चलें देखने….ll
उपवास किए बिना जल के,जल मध्य                                                                खड़े हैं अर्ध्य देने दिनकर को…                                                                            कर रहे प्रतीक्षा सभी उपासक,                                                                            प्रथम किरण उदय होने भास्कर कोl                                                                चलो चलें देखने….ll

त्यौहार नहीं ये जाति-धर्म का कोई,
है सभी जीव प्राणी-प्राणी का…
देती है सदा एक-सा वरदान प्रकृति,
सकल सृष्टि जनजीवन कोl
चलो चलें देखने आस्था की भीड़ll

                                                             #माधव कुमार झा
परिचय : माधव कुमार झा दिल्ली के जहाँगीर पुरी में रहते हैं l आपकी जन्म तिथि २० अगस्त १९९२ तथा  जन्म स्थान-गांव धेरूख पोस्ट बेनीपुर(बिहार) है l 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।