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“ढलती साँझ की धुँध”

 "तुम चले जाओगे तो सोचेंगे ,हमने क्या खोया क्यापाया" हॉस्पिटल के वेटिंग रूम में लगे टी.वी पर जगजीत की इस गजल को रिटायर्ड जज नासिर खान सुन रहे थे। साठ बसंत देख…
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मुलाकात

करके अनुपम श्रृंगार, भर के आंखों में प्यारl मिलने को मुझसे आई थी, परियों की रानी इक बारll  शरमाते हुए सामने से आकर, अपनी पलकों को झुकाकरl थमा गई हाथ…
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