स्कूली शिक्षा बारहमासी

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dashrath
पन्द्रह जून को सदा, शाला उत्सव जान।
माथे तिलक लगाइए,शारद का हो गान॥
पुस्तक दीजे हाथ में,खीर-पूरी भी साथ।
गुरु-शिष्य मिल बांचिए,ले के पुस्तक हाथ॥
मास जुलाई लागते,गणवेशा सिलवाय।
काम पूरा कीजिए, कहते हैं  कविराय॥
मास अगस्ता मध्य में,लो झंडा फहराय।
खीर-पूरी का भोज दे,सभी पेट भर खाय॥
सितंबरा में सायकल, देना तुम बँटवाय।
समग्र-आधार योजना,सही-सही लिखवाय॥
अक्टूबर के माह में,स्वच्छता अभियान।
मास नवम्बर छात्रवति,कहते कवि मसान॥
दिसम्बरा के अंत में, प्रतिभा पर्व महान।
जनवरी गणतंत्र दिवस,करे राष्ट्र सम्मान॥
फरवरी के आखरी, पूरे हो सब पाठ।
मार्च परीक्षा लीजिए,मर्यादा के साथ॥
अप्रैल माह में सदा,ऑडिट लो करवाय।
परिणाम भी पूरा करो,सबको दो सुनवाय॥
आरटीई कानून का,सदा करो सम्मान।
बलिहारी गुरु आपकी,सोलह आना पास॥
मई महीना ग्रीष्म का,सर्वे घर-घर आन।
बारह मासी गाइए,कहते कवि मसान॥
                                                     #डाॅ. दशरथ मसानिया
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।