आगर के उत्तर बसे,बैजनाथ भगवान। मनोकाम पूरण करें, सदा संवारे काम।। ऊपर मंगलनाथ है,खेड़ापति के पास।। मोपे किरपा कीजिये,एक तुम्हारी आस।। रत्ना मोती सुंदर सागर। धन्य भूमी है माता आगर।।१ मध्यदेश की थी रजधानी। नवम सदी इतिहास बखानी।।२ अचलेश्वर मां तुला भवानी। भेरु केवड़ सबके स्वामी।।३ जय जय बैजनाथ भगवाना। […]

 नाक सुआसी सी शोभती,  खिलते लाल कपोल। आंखन अंजन आंझके, नैना बने अमोल।।  हंस उड़ा बागन चला, ले मोतिन की आस। नगनथ देखो नाक को, मन में होत उदास।। नदी नाव संजोग से बहती पानी धार। नाविक नदिया एक से ,म्यान फंसी तलवार।। तोता मैना बोलती, चिड़िया करती चींव।  कोयल […]

निशिदिन के अभ्यास से, बिसरी विद्या आय। बिन अंगरेजी ज्ञान के, कोई पूछत नाय ।। जय जय जय अंगरेजी माता। तुम्हरी कीरति सब जग गाता।।1 ए  से  एपल  बी  से  बेबी। नइ पीढी  ने तुमको सेवी।।2 कटबटहट सब एक समाना। पुट का भेद हम नही जाना।।3 पश्चिम की तुम हो […]

  विनम्र श्रद्धांजलि जयजयजयजय तरुणासागर। सच्चाई  को किया उजागर। । ऋषभदेव से तुम अवतारी। महावीर से सत्य विचारी।। प्रताप शांति के घर जाये। पवन जैन जब नाम धराये।। चौदह बरस उमर थी भाई। छोड़ खिलोना मुनिपद पाई।। गढ छत्तीसा शिक्षा पाये। क्रांतिकारी मुनि संत कहाये।। सन अट्ठासी बीस जुलाई। बागी […]

नेह डोर ऐसी बँधी, जिसका कहीं न मोल । त्याग और अनुराग का ,रिश्ता ये अनमोल ।। भावों का गुंथन हुआ, जाग उठा उल्लास । कच्चे धागे ने किया, पक्का मन विश्वास ।। राखी के त्यौहार ने, कर डाला अनमोल । वरना धागे का रहा, दो कौड़ी का मोल ।। […]

राजनीतिजीवन बनी,दिलसे साहित साज। कबीर जैसी साधना,जनता रोती आज।। अटल बिहारी आपका, करता जग सम्मान। मर्यादा संविधान की, कहते कवी मसान।। जयजयजयजय अटलबिहारी । राजनीति भी तुमसे  हारी।। पच्चीस दिस चौबिसा आई। अटल बिहारी जन्में भाई।। कृष्ण बिहारी पिता तुम्हारे। जो शिक्षक थे सबसे न्यारे।। कविता साहित्य खूब रचाये। दीन […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।