उसकी बेबसी…

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priyanka jain
आज देखा उसकी आंँखों में एक अलग-सी चमक थी,
यूं तो खामोश थी वह, पर सब कुछ कह रही थी।
उतरा-सा चेहरा, फिर भी चेहरे पर मुस्कान,
यही तो थी उसकी गरीबी की पहचान।
बोली वह मुझसे आकर, कुछ खाने को चाहिए,
सोच में पड़ गई आज मैं,
सुना था मैंने जीने के लिए तो बस प्यार चाहिए।
भूखी थी वह कब से, लेकिन आशा से भरी आँखों में,
बेसब्री का खुमार था छाया,
क्या हुआ क्यों किसी को, उस मासूम पर जरा-सा प्यार न आया??
उसकी गरीबी ही तो थी उसकी कमजोरी,
इसीलिए तो खाने को भी हाथ फैलाना उसकी थी मजबूरी।
मैंने पूछा-तुम पढ़ने क्यों नहीं जाती???
सहम-सी गई मैं सुनकर, जब वह बोली…
मन तो बहुत करता है जाने का, पर इन फटे कपड़ों में पढ़ने जाऊँ कि अपनी लाज बचाऊं!!!
रो पड़ा हो दिल जैसे, बात सुनकर उसकी,
देखा फिर खुद की तरफ मैंने हताश नजरों से,
इतने कपड़े हैं कि मैं तो याद भी नहीं रख पाती।
पास बिठाकर पूछा उससे मैंने-क्यों मांगने जाती है??
बोली वो-क्या करुं, मां हम 6 बहनों का पेट कहां भर पर पाती है।
सोचने लग गई उस की बात पर,क्यों किसी की बेटा पाने की चाहत नहीं जाती।
जाग उठी मानवता मेरी, जितनी हो सकी कर दी मदद उसकी।
कुछ आज खुद ने समझ लिया और कुछ उसको भी समझा दिया,
लगा जैसे मैंने अपना फर्ज निभाना शुरू कर दिया।
                                                                                #प्रियंका जैन
परिचय : प्रियंका जैन का निवास मंदसौर जिला के शामगढ़ में है। २० साल की प्रियंका बीएससी की छात्रा है और कविताएँ रचती हैं। इसी लेखनी से ५ बार विद्यालय स्तर पर सम्मान पा चुकी है तो ३ बार जिला स्तर पर स्वरचित कविता में प्रथम विजेता रही है।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।