बेवफ़ाई की तुमने…

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lalit sinh

लह़द पर आकर मेरी आंसू बहाओगी,
जो दिल की बात अभी नहीं बताओगी l

कल्ब का हो जाएगा तेरा हाले-ज़ार,
फिर किसको अपना जख्म दिखाओगी l

शादमां न हो सकोगी कभी भी तुम,
लैलो-नह़ार ग़मज़दा जीवन बिताओगी l

करोगी इश़्क जब इक इबादत मानकर,
तो खुद पर इख्तियार कैसे कर पाओगी l

रिंद-सा चेहरा हो गया है अब तो मेरा,
मुझ पर भी क्या कोई लतीफा सुनाओगी l

ख़म नहीं हैं तेरी जुल्फों में अब उतना,
गम की लकीरें कैसे चेहरे से छुपाओगी l

बेवफ़ाई की तुमने मेरे साथ मुहब्बत में,
दूसरे से साथ बावफ़ा कहां बन जाओगी l

हम तो न जी पाएंगे फ़कत तुम्हारे बिन,
तुम ‘ललित’ बिन कैसे जीवन बिता पाओगी l

                                                                               #ललित सिंह

परिचय :ललित सिंह रायबरेली (उत्तरप्रदेश) में रहते हैं l आप वर्तमान में बीएससी में पढ़ने के साथ ही लेखन भी कर रहे हैंl  आपको श्रृंगार विधा में लिखना अधिक पसंद है l स्थानीय पत्रिकाओं में आपकी कुछ रचना छपी है l 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।