जिन्दगी जीना यूं सिखायेगां कौन, मुझ जैसा सबको मनायेगां कौन!! महज बात ही हो मेरी कही अगर, तो आलोचकों को सम्भाल पायेगां कौन! हर बार झुकते आये है हम ही, इस बार झुक कर दिखायेगां कौन! है हालात खराब अब मेरे बहुत, उनको बेहतर बना पायेगा कौन? जान ही तो […]

आरक्षण नाम तो सबने सुना ही होगा एक शब्द छोटा सा है। जो कि दलितों को आगे बढ़ाने में बहुत ही सहायक हैं। आरक्षण किसी का भी पुश्तैनी हक नही है और ना ही विरासत है!     अब सवाल ये उठता है कि आरक्षण का क्या सदुपयोग हो रहा […]

तोड़ दो हर रस्म और जंजीर को गम मिले जिससे उस तस्वीर को, लह़द में ही जायेगे सभी एक दिन फिर क्यूं तव्ज्जों दे हम वजीर को, सब पर परेशानी आती है जीवन में तो क्यूं ना समझें किसी की पीर को, जिन्दगी जीने के दो तरीके होते है फिर […]

प्यार से लोग नहीं अब बात करते हैं, किसी के पीछे नहीं वक्त बर्बाद करते हैंl  अक्सर पड़ जाता है काम एक-दूजे से, मगर क्यूं नहीं इसकी परवाह करते हैंl  ख्याल आया अचानक हमको उनका, क्या वो भी हमको किया याद करते हैं ? मालूम नहीं क्या सोचते हैं वो […]

प्रेम,इश्क,मुहब्बत,प्यार आखिर इन आधे अक्षरों में ऐसा क्या है कि प्यार से गुजरकर इंसान वो नहीं रहता,जो इश्क करने से पहले होता है… | जीवन का सही अर्थ प्रेम में ही समझ में आता है,फिर सारी जानकारी अनुभव बनने लगती है और अनुभव इंसान को रुपांतरित करने लगता है,यही रुपांतरण […]

दो जिस्म एक जान कभी हो ना पाए, हमेशा रहते हैं भीड़ में,अकेले हो ना पाएl  कौन याद करता है बिछड़ने के बाद अब, हम तो चाहकर भी तुम्हें भुला ना पाएl  हर किसी का वक्त बदलता है एक दिन जरूर, बस वक्त पर ही अधिकार सब जमा ना पाएl  […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।