हिन्दी का विरोध और राजनीति

Read Time0Seconds
cropped-cropped-finaltry002-1.png
हिन्दी विरोधी ट्विटर अभियान के बाद `हमारी मेट्रो,हम नहीं चाहते हिन्दी` दो मेट्रो स्टेशनों-चिकपेट और मैजेस्टिक के हिन्दी में लिखे गए नामों को 3 जुलाई को अखबार और टेप की मदद से ढँक दिया गया है। ये मेट्रो बोर्ड कन्नड़,अंग्रेजी और हिन्दी में थे। केआरवी कार्यकर्ता प्रवीण शेट्टी ने रेस्त्रां के खिलाफ हिन्दी और अंग्रेजी विरोधी कार्रवाई की। उन्होंने बताया कि,हमने यह इसलिए किया क्योंकि,व्यापर और अपने फायदे के लिए कर्नाटक की जमीन और यहां की बिजली का उपयोग किया जाता है लेकिन वे कन्नड़ भाषा के उपयोग या कन्नड़ लोगों को नौकरी नहीं देना चाहते हैं। शेट्टी ने कहा कि यदि कर्नाटक में हिन्दी व अंग्रेजी का उपयोग किया जाता है तो उनकी मांग है कि,दिल्ली व अन्य जगहों में कन्नड़ भाषा का उपयोग किया जाए।
यदि दिल्ली व अन्य जगहों पर आप कन्नड़ साइन बोर्ड का उपयोग करते हैं तो हम भी कर्नाटक में हिन्दी व अंग्रेजी का उपयोग करेंगे। 

कर्नाटक के मुख्‍यमंत्री सिद्धरमैया ने हिन्दी विरोधी ब्रिगेड का समर्थन किया और अधिकारियों से पता लगाने को कहा है कि गैर हिन्दी भाषी राज्यों जैसे तमिलनाडु,केरल,पश्चिम बंगाल आदि में क्या नीति अपनाई गई है। मुख्यमंत्री के निर्देश का अनुसरण करते हुए कन्नड़ विकास अधिकरण ने बेंगलूर मेट्रो रेल कार्पोरेशन लिमिटेड को नोटिस जारी कर दिया,जिसमें सवाल किया है,कि वह तीन भाषाओं वाली नीति का उपयोग क्यों कर रहा है।
(साभार-वैश्विक हिन्दी सम्मेलन,मुंबई)
                                                                                                                     #प्रवीण कुमार जैन
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

वह आदिवासी लड़की

Thu Jul 13 , 2017
वह आदिवासी लड़की जिसे समझते हैं लोग असभ्य और समझते हैं कि उसके सर में भूसा भरा होता है, जो लीपती है रोज़ गोबर से सने हाथों से घर-आंगन।   जिसे अधिकार नहीं है चूल्हे-चौके से आगे कुछ करने का न ही देहरी लांघ लंबी घुमावदार सड़कों पर अल्हड़-सा बचपन जीने काl, जो सूरज की तपिश निगल जलाती है अपना बदन।   अथक काम करते खेतों में जिसे मजबूरी में कभी रखना पड़ता है गिरवी अपना कुंवारापन, शहरी बाबुओं की भूखी लपलपाती निगाहों के आगे सच मानिए, छूना चाहती है वह भी चमकते चाँद-सितारे, दौड़ना चाहती है वह भी खुले विस्तृत आकाश में अपने रंग-बिरंगे सपनों के पीछे।   चाहती है वह भी, चमत्कृत कर देना पूरी दुनिया को अपने हाथों से रचकर एक प्रेम कविता परंतु,क्या इस सभ्य सुसज्जित समाज में `हासिल` कर पाएगी वह ऐसी दुनिया…l   दुख-दर्द,शर्म-मायूसी से उठकर, क्या एक करनैल का फूल शोभा पा सकेगा, एक स्वस्थ सम्मानित माहौल में… या फिर दम तोड़ देगी वह भी घुटकर अपने मृत होते सपनों के साथ …ll    #डॉ. आरती कुमारी परिचय : […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।