धुएँ से धुआं हुई है अब जिंदगी

0 0
Read Time1 Minute, 6 Second

धुएँ से धुआँ हुई है,अब जिंदगी ,
तम्बाकू से बर्बाद हुई है जिंदगी |
बचना चाहते हो अगर तुम इससे ,
तम्बाकू छोड़ो बचा लो ये जिंदगी ||

धुआँ राख़ कर रहा है ये जिंदगी ,
मिला रहा है ये ख़ाक में जिंदगी |
बंद करो उड़ाना तुम इस धुएँ को ,
वरना ख़त्म हो जायेगी ये जिंदगी ||

धुएँ से धुँधली हो रही है ये जिंदगी ,
अपने आग़ोश में ले रहा है जिंदगी |
मौत को बुला ले किसी को पता नहीं ,
धुएँ से बचा लो अपनी ये जिंदगी ||

जिसने दिया तम्बाकू को निमंत्रण ,
उसको आ गया मौत का निमत्रण |
कैसे बचोगे तुम इस निमंत्रण से।
बस कर लो तम्बाकू पर नियत्रण ||

धुएँ को इस धरा से अब हटाना है ,
धुएँ से विश्व को मुक्त अब कराना है |
जब तक धुआँ रहेगा इस भू पर ,
तब तक मृत्यु को निकट आना है ||

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

matruadmin

Next Post

देहभान

Fri Apr 16 , 2021
सदा शुभ ही सोचिए शुभ स्वतः हो जायेगा सुख आत्मसात करोगे दुःख विदा हो जायेगा सकारात्मक सोच से सद राह निकलती है व्यर्थ सोच से मुक्ति मिले मन को खुशी मिलती है देहभान का त्याग करो अभिमान न रह पायेगा आत्मा निर्मल हो जाएगी मन पवित्र हो जाएगा ।#श्रीगोपाल नारसन […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।