सन्त सिपाही

0 0
Read Time1 Minute, 39 Second

सन्त सिपाही भारत के,
तुमको लख लख करें नमन।
तुम्हारे पावन चरणों में,
हम श्रद्धा सुमन करें अर्पण।

मिश्री सी मधुरता वाणी में,
बड़े सहज, सरल विचार।
भक्ति ,शक्ति का संगम हो,
धर्म ही जीवन का सार।

वीर हुआ ना तुम सा कोई,
ना तुम सा कोई बलिदानी।
इतिहास के पन्नों पर तुमने,
एक रच दी अमर कहानी ।

ज्ञान भक्ति की गंगा दिल में,
सदा ही जिसके बहती है।
त्याग,समर्पण ,देशभक्ति की,
एक नई कहानी कहती है।

फूल मिले या शूल मिले,
या मौसम प्रतिकूल मिले।
कष्टों की ना चिंता कोई,
मंजिल अपनी जरूर मिले।

मात-पिता सब खो दिए,
खोये अपने सुत चार।
फिर भी हार ना मानी थी,
की मुगलों से आँखें चार।

वीर,पराक्रमी,बलशाली,
सिंह ने मारी दहाड़।
अपनी बाजुओं की शक्ति से,
मुगलों को दिया पछाड़।

गुरु तुम जैसा पाकर के,
सारा जग हुआ निहाल।
त्याग,समर्पण की अद्भुत,
कायम की जग में मिसाल।

भारत माँ का सुत प्यारा ये,
दशम गुरु सरदार हुआ।
धर्म की रक्षा की ख़ातिर,
अपना सब कुछ वार दिया।

अत्याचार ,अन्याय,अधर्म,
जब शीश उठाता है।
मानवता की रक्षा को तब,
तुम सा अवतारी आता है।

स्वरचित
सपना (स. अ.)
जनपद-औरैया

matruadmin

Next Post

रमाबाई

Thu Jan 21 , 2021
रमाबाई गुजर गईं । इस समाचार को जिसने भी सुना वह ही आश्चर्य में पड़ जाता ‘‘ऐसा कैसे हो सकता है भला……अभी चार-पांच दिन पहिले तक स्कूल में काम कर रही थी वह बीमार भी नहीं थी फिर अचानक कैसे गुजर गई । सभी का आश्चर्य उस समय और बढ़ […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।