बदनामी

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ranu dhanoriya
हिफाजत की नजर में नजरों को गुलाम कर बैठी,
बिखर कर जुल्फ चेहरे पर कत्लेआम कर बैठी।
वाकिफ हो भला कैसे हकीकत से नुमाइश की,
अपनी पहंचान को जब गैर के वो नाम कर बैठी।
बगावत हम भी करते थे पर तूफान को कम कर,
मेरे अल्फाज को वो मेरा ही गुलाम कर बैठी।
चुनरी मखमली ऐसी मेरे चेहरे पर अटकी,
दिन को यामिनी और सुबहो को शाम कर बैठी।
शराफत आपके शहरों की वो सुर्खियां देती,
रूबरू जब से हुए हम बेगाना तमाम कर बैठी।
मेरी छत पे आ उसने पतंगें सारी काट डाली,
हवाओं की तरह मुझे वो गुमनाम कर बैठी।
इनायत हम पे कर दी उसने इर्शाद फरमाकर,
एक ही लफ्ज़ में महफ़िल मुझे सलाम कर बैठी।
जान देकर अमर अब नाम क्या हम करें ‘रानू’,
ये मोहब्बत भी तो कितनों को बदनाम कर बैठी॥
                                #रानू धनौरिया
परिचय : रानू धनौरिया की पहचान युवा कवियित्री की बन रही है। १९९७ में जन्मीं रानू का जन्मस्थान-नरसिंहपुर (राज्य-मध्यप्रदेश)है। इसी शहर-नरसिंहपुर में रहने वाली रानू ने जी.एन.एम. और बी.ए. की शिक्षा प्राप्त की है। आपका कार्यक्षेत्र-नरसिंहपुर है तो सामाजिक क्षेत्र में राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़ी हुई है। आपका लेखन वीर और ओज रस में हिन्दी में ही जारी है। आपकॊ नवोदित कवियित्री का सम्मान मिला है। लेखन का उद्देश्य- साहित्य में रुचि है।
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matruadmin

2 thoughts on “बदनामी

  1. नरसिंह भूमि की रचनाओं व रचनाकरों का सम्बल मिले बधाई,,,

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।