जाग रे मनुवा

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Manilal
जाग रे मनुवा जाग रे, खोल दे नैनन पट को।
अंतर्मन में बसे प्रति क्षण, काहे ढूंडे घट-घट को॥
मान रे मनुवा जान रे, छोड़ तू धर्म झंझट को।
इंसानियत जगा ले तू ,कुछ न जाए मरघट को॥
चल बढ़ा कदम अपना,प्रकाश की तलाश कर।
स्वविवेक से दीप जला,अज्ञानता का नाश कर॥
बहरूपिया करे धंधा,नीलाम करता ईमान को।
गुरु उसे बनाकर तू,साझा करता बदनाम को॥
अस्मिता खुद की भुला, भूला अपना अस्तित्व।
जब से धर्मान्धाता में पड़ा,भूला तुमने दायित्व॥
ले सबक,न बहक, अच्छा हो एकांतवास कर।
परोपकार का भाव बसाए, नाम हर श्वांस कर॥
क्या सही,क्या गलत ?नहीं तुझे कुछ भी भान।
तेरे जैसे अंधभक्तों को,समझ न आए विज्ञान॥
होता तेरा तभी तो शोषण, जान तुझे अनजान।
इस भेड़चाल से कब मुक्त हो,मेरा भारत महान॥
गर गिर गया है खाई में, चल निकल प्रयास कर।
बन चालक अपना,जीवन को न वनवास कर॥
                                                    #मनीलाल पटेल(मनीभाई)
परिचय:मनीलाल पटेल(मनीभाई) का निवास छत्तीसगढ़ के जिला-महासमुंद स्थित ग्राम-भौंरादादर,पोस्ट-लंबर तहसील-बसना में है। आप अधिकांशत कविताएँ लिखते हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।