कर लो सुध कुदरत की आज, की है हमने जिससे छेड़छाड़। करके छिद्र ओजोन परत में, क्यों रहे स्वार्थ के झंडे गाड़। अपनी धरा के सुरक्षा कवच को, हम सब मिलकर तोड़ रहे। बो कर कांटे राहों में अपनी, फूलों की बाट जोह रहे । अपने आराम कि खातिर हमने, […]

आधुनिक समाज की रीढ़ , यूं ही नहीं कहलाते ये अभियंता। तन ,मन ,लगन और मेहनत से, अपना धर्म निभाते हैं ये अभियंता। तन मन में समाया जिनके पागलपन, जनसेवा में गवाएं अपना सारा जीवन। इरादे हैं पक्के और दिल में जोश भरा, आशा के दीप जलाएं मन में ये […]

भारत माता के माथे बिंदी, बड़ी प्यारी लागे भाषा हिन्दी। मां की ममता सी प्यारी हिंदी, मधु सी मीठी लागे भाषा हिन्दी। सरस ,सरल और सहज है हिन्दी, सबके मन भावे भाषा हिन्दी। हर दिल की धड़कन भाषा हिन्दी, रग रग में बसी है भाषा हिन्दी। प्यार की भाषा, परिभाषा […]

भय निराशा कुंठा असफलता से, माना लड़ना आसान नहीं। पर मुश्किलों से डर कर , ‘आत्महत्या’ करना समाधान नहीं। किसी को जीवन दे ना सको, तो जीवन लेने का अधिकार नहीं। अपमान किया जो जीवन का, तो तुझसा कोई नादान नहीं। ईश्वर की नेमत से तुझको , ये जीवन एक […]

अदम्य शौर्य की परिभाषा तुम, बहादुरी की गाथा हो। नीरजा तुम सारे जग में, नारी जाति की आशा हो। धीरज भरा कूट कूट कर, साहस में लक्ष्मीबाई स्वरुपा हो। मौत भी जिसको डरा सकी ना, ऐसी शक्तिस्वरूपा हो। हाईजैक जब हुआ विमान, तू बिल्कुल ना घबराई। सूझ बूझ से नीरजा […]

जीवन में प्यारी निंदिया , श्रृंगार में न्यारी बिंदिया । अंखियों में छाए निंदिया , माथे पे साजे बिंदियां । दोनों करती खूब कमाल , करती दोनों खूब धमाल। दोनों बड़ी हैं बेमिसाल, खूबसूरती से मालामाल। अखियां सूनी निंदिया बिन, श्रृंगार है सूना बिंदिया बिन। जब साथ ना दे तन […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।