माँ

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naveen jain

(आज मातृ दिवस के अवसर पर विशेष )
माँ का हृदय रत्नाकर-सा,
माँ तारापथ समान है।
माँ की जान बसे बच्चों में,
माँ बच्चों की जान है।।

माँ खुशियाँ संग मनाती है।
माँ मिश्री-सी,लोरी सुनाती है।।

माँ गलती पर बच्चों को डाँटती है।
माँ अपना दुःख न बाँटती है।।

माँ की ममता सिंधु-सी विशाल है।
माँ बच्चों की रक्षक,भाल है।

बच्चों पर जो छाए संकट,
माँ कालिका बन जाती है।
जैसे निज शिशु की रक्षा हेतु,
हिरनी;सिंह से लड़ जाती है।।

  #नवीन कुमार जैन 

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One thought on “माँ

  1. हार्दिक आभार आदरणीय, मेरी रचना को वेबसाइट पर प्रकाशित करने के लिए ।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।