वो मुझे नहीं मिलती।।

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ढूंढता हूं जिसे कि, वो मुझे नहीं मिलती
चाहता हूं जिसे कि, वो मुझे नहीं मिलती
दर्द का रिश्ता हमारा रहा है सदियों से
दुकां में ढूंढी खुशी, वो मुझे नहीं मिलती।।

मिली जो पहली नजर, वो मुझे नहीं मिलती
रखा था जिसकी खबर, वो मुझे नहीं मिलती
तरस गये है अब दीदार उसका पाने को
नज़र जो ढूंढे नज़र, वो मुझे नहीं मिलती।।

शराफत उसकी गज़ब, वो मुझे नहीं मिलती
नज़ाकत उसकी गज़ब, वो मुझे नहीं मिलती
हाथों से चेहरा ढका था जो उसने शरमाकर
हया थी उसकी गज़ब,वो मुझे नहीं मिलती।।

अब तो मुस्कान गज़ब,वो मुझे नहीं मिलती
थी मेरी जान गज़ब, वो मुझे नहीं मिलती
उसकी फितरत थी अलग सोचने की आदत थी
जो थी इन्सान गज़ब, वो मुझे नहीं मिलती।।

आंखों में आब गजब, वो मुझे नहीं मिलती
संजोया ख्वाब गजब, वो मुझे नहीं मिलती
हटा के रुख से अपने परदा अदब फरमाया
की जो आदाब गजब, वो मुझे नहीं मिलती।।

देखे मुड़ मुड़ के रस्ते, वो मुझे नहीं मिलती
कटा सफर जो हंसते, वो मुझे नहीं मिलती
सुनाया उसका जो किस्सा सभी फरिश्तों को
तरसते हैं फरिश्ते, वो मुझे नहीं मिलती।।

है उसकी सोच अलग, वो मुझे नहीं मिलती
है उसकी खोज अलग, वो मुझे नहीं मिलती
जिन्दगी जीने का उसको सलीका है मालूम
दिलों में मौज अलग, वो मुझे नहीं मिलती।।

जो सबसे बेहतरीन, वो मुझे नहीं मिलती
दिखे जो नाज़नीन, वो मुझे नहीं मिलती
मिला जो उससे तो फिर दिल में ये ‘एहसास’ हुआ
है जो सबसे हसीन, वो मुझे नहीं मिलती।।

अजय एहसास

अम्बेडकर नगर (उ०प्र०)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।