मै महाकाल,मै महाकाल

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मै महाकाल,मै महाकाल
मै काल का हूं, महाकाल

उज्जैन में है मेरा निवास,
जहा पकड़ा गया था विकास
मै पूरी करता हूं सबकी आस
जो श्रद्धा से आता है मेरे पास
मैंने विकास को बुलाया तत्काल
मै महाकाल मै महाकाल
मै काल का हूं ,महाकाल

नेता भी मेरे दर्शन को आते,
श्रद्धा से मेरे को शीश झुकाते।
बाहुबली भी यहां आते है,
सर्वश अपना यहां चढ़ाते हैं।
मै करता हूं सबकी देखभाल,
मै महाकाल,मै महाकाल।
मै काल का हूं, महाकाल।।

गांधी नेहरू भी यहां आए थे,
इंदिरा राजीव भी यहां आए थे।
सी एम पी एम भी सब आते,
श्रद्धा के अपने सुमन चढ़ाते,
पूरी करता हूं इच्छा तत्काल।
मै महाकाल, मै महाकाल।
मै काल का हूं, महाकाल।।

जो दुष्ट मेरे पास आता है,
बच कर मुझसे न जाता है।
भले ही मेरे दर्शन कर ले
फल जरूर वह पाता है।।
देखा विकास क्या हुआ हाल
मै महाकाल,मै महाकाल।
मै काल का हूं, महाकाल।।

मै सब काल का हूं महाकाल,
मुझसे बचकर न वह जाएगा।
करले बचने के जितने प्रयत्न,
वह मृत्यु को शीघ्र ही पाएगा।
मै निर्णय लेता हूं तत्काल,
मै महाकाल,मै महाकाल।
मै काल का हूं महाकाल।।

इस काल के अंदर राज छिपे है
बहुत से नेताओ के राज छिपे हैं।
पुलिस पर जो आरोप लगे हैं
अब दफना दिये जा चुके हैं।
कर दिया इस घटना ने कमाल।
मै महाकाल,मै महाकाल।
मै काल का हूं महाकाल।।

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

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matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।