मेरी भाषा

Read Time0Seconds

मेरी भाषा सन्नाटा बनी
तब भी हम चुप रहे।
अंग्रेजी की छाया में छिपी
तब भी हम चुप रहे।

यह सन्नाटा धमाकों
के साथ प्रवेश कर गया।
भाषा लुप्त सी होती ,
दिखी ,तो भी हम चुप रहे।

धीरे धीरे अपनी भाषा
धूमिल सी होने लगी,
नजरिया बदलने लगा।
तब भी हम चुप रहे।

अंग्रेजी की इमारत में
नींव का पत्थर बनी ।
मिट्टी में शामिल होने लगी
तब भी हम चुप रहे।

संस्कारों की नींव ,
डगमगाने लगी,
नैतिकता और संस्कृति जब
हिलने लगी।तब भी हम चुप रहे

देखते ही देखते
मन में बसकर
युवाओं को मदहोश ,
कर गई।तब भी हम चुप रहे।

जागो युवा!जागो युवा!
गर्व अपनी भाषा पर करो
गुमान अपनी ,
संस्कृति पर करो।

मनीषा व्यास, इंदौर

परिचय:

मनीषा व्यास
शिक्षा एम ए हिंदी , एम फिल हिंदी बी एड
बीस वर्षों से सी बी एस ई विद्यालयों में अध्यापन
कार्य । डॉ सतीश दुबे जी
की लघुकथाऔर लघुकथा के विकास में मालवा के लघुकथा कारो का योगदान विषय पर शोध प्रबन्ध।रस रहस्य , काव्य में बिम्ब विषय पर शोध पत्र ,पत्र पत्रिकाओं अखबारों में लेख ,लघुकथा , कविताएं।लेखिका संघ द्वारा प्रकाशित पुस्तक सिलवटें में लघुकथाएं
प्रकाशित।मै रहूं न रहूं भारत ये रहना चाहिए।काव्य संग्रह में तिरंगा हमारी मिट्टी की शान विषय पर कविता ।काव्य कुंज साहित्यिक पत्रिका में प्रकाशित आलेख मिट्टी की सौंधी खुशबू बरकरार रहे ।
प्रदेश वार्ता अख़बार में कविताएं प्रकाशित स्मेश पत्रिका में प्रकाशित आलेख और कविताएं ।हिंदी रक्षक मंच द्वारा
महादेवी वर्मा स्मृति कवयित्री सम्मेलन में प्राप्त सम्मान ।दबंग दुनिया के द्वारा एजुकेशन एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित। कार्यक्रमों का संचालन।

Attachments area

0 0

matruadmin

Next Post

विहिप का आह्वान : कोरोना संकट में कोई भूखा न सोये

Tue Mar 24 , 2020
जारीकर्ता विनोद बंसल राष्ट्रीय प्रवक्ता विश्व हिंदू परिषद Post Views: 21

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।