विश्व हिन्दू परिषद के महामंत्री श्री मिलिन्द पराण्डे का प्रेस वक्तव्य

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        बांसवाडा। 
 विश्व हिंदू परिषद(विहिप) आज देशभर में हिंदू समाज के  उत्थान के लिए एक लाख से अधिक सेवा कार्य (शिक्षा, चिकित्सा,  आर्थिक स्वावलंबन, महिला सशक्तिकरण तथा कौशल विकास के क्षेत्र में) चला रहा है। हाल ही में संपन्न हित चिंतक अभियान के माध्यम से सम्पूर्ण देश में 30 लाख से अधिक हिंदू, विश्व हिंदू परिषद से नए जुड़े हैं। नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरुद्ध चलाए जा रहे कथित आंदोलन की आड़ में राष्ट्रीय सम्पत्ति तथा हिन्दुओ, उनके घरों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को पूर्व नियोजित तरीके से निशाना बनाए जाने की विश्व हिंदू परिषद कड़ी निंदा करती है।


  सीएए का संबंध केवल पाकिस्तान अफगानिस्तान तथा बांग्लादेश में धार्मिक दृष्टि से प्रताड़ित अल्पसंख्यकों (हिंदू, सिक्ख, जैन, बौद्ध, पारसी तथा ईसाई) शरणार्थियों से है, जो भारत में शरण लेने के लिए आए हैं। विगत एक सप्ताह में पाकिस्तान में 3 से ज्यादा हिन्दुओं और सिक्खों कन्याओं का अपहरण कर जबरन शादी कर मुसलमान बनाया गया है जो सीएए की आवश्यकता की और पुष्टि कर रहा है। सीएए का संबंध केवल इन शरणार्थियों को सुरक्षा तथा नागरिकता प्रदान करने से हैं। सीएए किसी भी भारतीय की नागरिकता छीनता नहीं है।

  हाल ही में झारखंड राज्य के लोहरदगा में सीएए के समर्थन में निकली रैली के ऊपर हिंसक मुसलमानों की भीड़ ने हमला किया, जिसमें अनेक हिंदू घायल हुए, अनेक हिंदू घर जलाए गए तथा श्री नीरज राम प्रजापति की दुर्भाग्यपूर्ण हत्या हुई, जिसकी विश्व हिंदू परिषद कड़ी निंदा करती है तथा उस हमलों में शामिल सभी लोगों के ऊपर हत्या, दंगा भड़काने, आगजनी और संपत्ति के नुकसान का आरोप निश्चित करते हुए उनकी  गिरफ्तारी की मांग करती है। साथ ही, सभी पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा भी देने की मांग भी करती है।

  जो राजनीतिक दल ऐसे हिंसक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं, आवाहन करते हैं, उसमें सहभागी होते हैं या उसका समर्थन करते हैं ऐसे सभी लोगों के विरुद्ध भी कड़ी कानूनी  कार्रवाई करने की आवश्यकता है। इन आंदोलनों की आड़ में हिंदू समाज के ऊपर किए जाने वाले हिंसक हमले कतई स्वीकार्य नहीं है।

  कश्मीरी हिंदुओं को जब हमलावर मुस्लिम भीड़ ने कश्मीर घाटी से हिंसक हमला करते हुए बाहर किया था, तब उस समय इनमें से कोई भी राजनीतिक दल संविधान का हवाला देकर उनकी मदद के लिए सामने नहीं आया। इसलिए यह हिंसक आंदोलन हिन्दू समाज को विभाजित करने के लिए केवल एक प्रायोजित प्रयास ही है।

  राजस्थान में साम्यवादी विचारधारा के लोग, चर्च और कुछ राजनीतिक दल दुष्प्रचार कर रहे हैं कि भील समाज हिंदू नहीं है, जबकि इसी भील समाज के पराक्रमी राणा पूंजा भील, स्वतंत्रता सेनानी टाटिया भील, पूज्य गोविंद गुरु जी, पूज्य मावजी महाराज तथा श्री मामा बालेश्वर दयाल जी जिन्होंने हिन्दू धर्म तथा समाज की रक्षा के लिए हिन्दू समाज का नेतृत्व करते हुए अभूतपूर्व पौरुष दिखलाया। इसलिए विश्व हिंदू परिषद,  हिंदू समाज के सभी वर्गों को आवाहन करती है कि ऐसे दुष्प्रचार के झांसे में ना आए।

   माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने, श्री राम जन्मभूमि ही भगवान श्री राम जी का जन्म का स्थान है, यह ऐतिहासिक सत्य न्यायालय में स्वीकार कर लिया है। आज केंद्र सरकार में श्री राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े हुए ऐसे अनेक कार्यकर्ता है. इसीलिए विश्व हिंदू परिषद को यह विश्वास है कि हिंदू आस्थाओं और विचारों का सम्मान करते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार केंद्र सरकार श्री राम जन्मभूमि निर्माण के लिए योग्य व्यवस्था जल्दी ही निर्माण करेगा. विश्व हिंदू परिषद की मांग है, कि बनने वाली व्यवस्था सरकारी ट्रस्ट नहीं होनी चाहिए, सरकारी पैसे से मंदिर नहीं बनना चाहिए तथा जो प्रारूप राम जन्मभूमि आंदोलन के समय समाज में लोकप्रिय हुआ है उसी के अनुसार मंदिर बनना चाहिए। मंदिर निर्माण के लिये पत्थरों की गढाई विगत 27 वर्षों से अयोध्या में चल रही है, जो पूर्ण होने को ही है. अतः विश्व हिन्दू परिषद मांग करती है कि इन्हीं पत्थरों से राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए और हमें विश्वास है कि केंद्र सरकार द्वारा हिंदू समाज की आस्थाओं और भावना का पूर्ण सम्मान किया जायेगा।

  श्री राम जन्मभूमि आंदोलन के इस यश के निमित्त, आने वाले चैत्र नवरात्रि के दौरान, 25 मार्च वर्ष प्रतिपदा से लेकर 8 अप्रैल श्री हनुमान जयंती तक विश्व हिंदू परिषद संपूर्ण हिंदू समाज की सहभागिता के साथ भव्य रथ यात्राओं के द्वारा प्रखंड स्तर तक के भव्य कार्यक्रमों के साथ लाखों गांव गांव तक राम उत्सव अत्यंत अनुशासन पूर्वक तथा हर्षोल्लास से मनाएगी।

जारी कर्ता :

विनोद बंसल

(राष्ट्रीय प्रवक्ता)

विश्व हिन्दू परिषद,

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।