चाहत

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चाहत चंदा चाँदनी, चातक चलित चकोर।
द्रोही तम को चाहते, सर्प निशाचर चोर।।
. ✨✨२✨✨
चाहत तुलसी दास की, राम सिया हनुमान।
रामचरित मानस रचे, कविता छंद विधान।।
. ✨✨३✨✨
चाहत कुंती की भली, दैव कृपा से पूत।
सूर्य पुत्र को जन्म दे, पालन हो घर सूत।।
. ✨✨४✨✨
चाहत पावन द्रौपदी, भ्रात भक्ति भगवान।
भरी सभा में कृष्ण ने, रखी लाज तब आन।।
. ✨✨५✨✨
चाहत बूँदे स्वाति की, कदली सीप भुजंग।
जैसी जिसकी भावना, ढाले अपने ढंग।।
. ✨✨६✨✨
चाहत मोर पपीह की, दादुर कोयल सर्प।
मेघ नेह चाहे धरा, सजनी सावन दर्प।।
. ✨✨७✨✨
चाहत शबरी भक्ति मति,भाव सजाये हेत।
बेर प्रेम के खाय प्रभु, आये अनुज समेत।।
. ✨✨८✨✨
चाहत मन हनुमान के, श्रद्धा संगति धाम।
सीना चीरे आप का, दर्शन सीता राम।।
. ✨✨९✨✨
विदुर पार्शवी भक्तिरत, माधव मान सुभाग।
प्रेम पाश बँध जीमते, केले छिलके साग।।
. ✨✨१०✨✨
चाहत बनी स्वतंत्रता, सुत मिट गये अकूत।
मात भारती हित मरे,शत शत धन्य सपूत।।
. ✨✨११✨✨
चाहत अपने देश की,रखें आन अरु शान।
मान तिरंगे का करें, पालन वतन विधान।।
. ✨✨१२✨✨
चाहत फिर मानुष बनूँ, जन्मूँ भारत देश।
हिन्दी हिन्दुस्तान हित, पहनू कबिरा वेष।।
. ✨✨१३✨✨
चाहत मेरी जन्म भर, लिखना दोहे गीत।
शर्मा बाबू लाल की, निभे बिहारी रीत।।
. ✨✨१४✨✨
चाहत वतन अखंड हो,भाषा एक विवेक।
मानवता हो भाव मन, हर मानव में नेक।।
. ✨✨१५✨✨
चाहत निर्मल प्रेम मन, प्राणी सकल सनेह।
देव दनुज सुर नाग नर, पंछी काम अदेह।।

नाम–बाबू लाल शर्मा 
साहित्यिक उपनाम- बौहरा
जन्म स्थान – सिकन्दरा, दौसा(राज.)
वर्तमान पता- सिकन्दरा, दौसा (राज.)
राज्य- राजस्थान
शिक्षा-M.A, B.ED.
कार्यक्षेत्र- व.अध्यापक,राजकीय सेवा
सामाजिक क्षेत्र- बेटी बचाओ ..बेटी पढाओ अभियान,सामाजिक सुधार
लेखन विधा -कविता, कहानी,उपन्यास,दोहे
सम्मान-शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र मे पुरस्कृत
अन्य उपलब्धियाँ- स्वैच्छिक.. बेटी बचाओ.. बेटी पढाओ अभियान
लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः 10

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।