वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय लागू करेगा ब्रह्माकुमारीज का मूल्यपरक शिक्षा पाठ्यक्रम

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उत्तराखंड के रुड़की में खुलने जा रही व उत्तर प्रदेश के गजरौला व अरुणाचल के इटानगर में पहले से ही स्थापित वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी ब्रह्माकुमारीज का मूल्यपरक शिक्षा पाठ्यक्रम लागू करने जा रही है।ब्रह्माकुमारीज संस्था से जुड़े साहित्यकार श्रीगोपाल नारसन के प्रयासों से ब्रह्माकुमारीज व विश्वविद्यालय के बीच उक्त बाबत केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद की मौजूदगी में ब्रह्माकुमारीज मुख्यालय माऊंट आबू में एमओयू साइन हुए है।जिसे
वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय की शिक्षा जगत में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।यह एमओयू माऊंट आबू में आयोजित वैश्विक शिखर सम्मेलन में 27 देशों के विख्यात हस्तियों एवं शिक्षाविदों की उपस्थिति में वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय एवं प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के बीच”वेल्यू एजुकेशन”को लेकर करार हुआ।इसके साक्षी बने देश के केंद्रीय कानून व न्याय एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद, गृह राज्य मंत्री के. रेड्डी, केंद्रीय जल संसाधन मंत्री अर्जुन सिंह मेघवाल,अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के लंदन के अम्बेसडर मिस्टर जेम्स फ्रेजर स्काट,अंतरराष्ट्रीय लाइफ मैनेजमेंट आध्यात्मिक ट्रेनर बी.के शिवानी । ब्रम्हकुमारी एजुकेशन विंग के चैयरमेन डॉ. बी.के मृतुन्जय व विश्विद्यालय की ओर से प्रति कुलाधिपति डॉ राजीव त्यागी ने अनुबन्ध पर हस्ताक्षर किए।, जिसके तहत दोनों विश्वविद्यालय पूरे विश्व में “वेल्यू एजुकेशन, चरित्र निर्माण, राजयोग, आद्यात्म एवं राष्ट्र निर्माण की शिक्षा मिलकर देने का कार्य करेंगे।ब्रम्हकुमारी विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय माउन्ट आबू मैं आयोजित”अंतरराष्ट्रीय विश्व आध्यात्मिक सम्मेलन मैं उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू मुख्य अतिथि एवं राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।वेंकटेश्वरा समूह के चैयरमेन एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. सुधीर गिरि, शिक्षाविद डॉ. श्रीमती वीना सिंह ने इस”ऐतिहासिक शेक्षणिक अनुबंध”के लिए पूरे वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय परिवार को शुभकामनाएं प्रेषित की है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।